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सेक्सी पड़ोसन के मजे लूटे

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प्रेषक : सौरव …

हैल्लो दोस्तों, में इस साईट का नियमित पाठक हूँ और आज में भी अपनी लाईफ की एक सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ जो मेरे और मेरे सामने वाली मकान की आंटी के साथ हुआ था। मेरी उम्र फिलहाल 24 साल है और में एम.बी.ए की पढ़ाई कर रहा हूँ, ये स्टोरी तब की है, जब में 12वीं क्लास में था। अब में आपका समय ज्यादा ख़राब ना करते हुए सीधे अपनी स्टोरी पर आता हूँ। दोस्तों मेरा नाम सौरव है और में छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ, में हमेशा से अपनी बॉडी की देखभाल करता हूँ और 12वीं क्लास के वक़्त से ही मैंने जिम जाना शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से मेरी बॉडी काफ़ी सुन्दर में है। अब में सीधे स्टोरी पर आता हूँ, इस स्टोरी में जो आंटी है, उसका नाम कविता है, जो एक बंगाली हाउस वाईफ है और उसकी उम्र 46 साल है, जो मुझे बाद में पता चली, उसका फिगए क्या बताऊँ? कोई भी उसे देख ले तो उसे चोदने का मन बना ले, उसका फिगर 42-41-46 और गांड को देखकर मानो ऐसा लगता था कि जब मौका मिले उसे पकड़ लूँ और खा जाऊं।

आंटी हमारी पड़ोसी थी तो रोज़ कोई ना कोई काम से वो हमारे घर आती रहती थी और जब वो घर में रहती थी, तो वो ज़्यादातर मैक्सी ही पहनती थी और हमारे घर आते वक़्त भी वो मैक्सी ही पहनकर आती थी। सच में दोस्तों क्या कहूँ? जब वो आती तो मेरे मानो होश ही खो जाते थे, वो मखमली मैक्सी में आती थी और उसके बड़े-बड़े बूब्स मानो बाहर निकलने के लिए तरस रहे हो। अब जब भी वो आती तो में मौका देखकर उसके सामने बैठ जाता और जब वो कभी बातों-बातों में मेरा हाथ पकड़ती, तो में मानो मदहोश ही हो जाता था। जब वो अपने बाल ठीक करती तो उसके आर्म्सपॉइंट के छोटे-छोटे बाल दिखते, जिसको देखकर में पागल ही हो जाता और उसका नाम लेकर मुठ मारता, लेकिन साथ ही में दुखी रहता था कि मुझे उसे चोदने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

उसके पति कपड़े की फेक्ट्री में काम करते थे और वो अक्सर दूसरी सिटी में कपड़े की डिलवरी करने के लिए जाते रहते थे और उनके एक 8 साल की बेटी थी, जो कि स्कूल में पढ़ती थी, तो लगभग दिनभर आंटी घर में अकेली ही रहती थी। फिर में अक्सर कोई ना कोई बहाने से आंटी के घर जाता और उनसे बातें करके वक़्त बिताता और मौका मिलते ही उसके क्लीवेज और बूब्स को भी देखने की कोशिश करता। एक दिन क्या हुआ? मम्मी और पापा को किसी जरुरी काम से रिश्तेदार के घर जाना था, तो मुझे उस दिन अकेला रहना था। फिर कुछ देर के बाद मम्मी पापा अपने रिश्तेदार के वहाँ चले गये।

फिर आंटी हमारे घर आई और मम्मी को बुलाने लगी तो मैंने बोला कि आंटी मम्मी किसी काम से रिश्तेदार के घर गयी है और आज वहाँ ही रहेगी। फिर आंटी ने मुझे बोला कि बेटा तू खाना क्या खायेगा? चल आज हमारे घर पर खा लेना। अब मेरी तो जैसे लॉटरी सी लग गयी थी और फिर मैंने ज़्यादा नाटक नहीं करते हुए मैंने ठीक है कहा और आंटी के साथ उनके घर चला गया। जब गर्मी का मौसम था और आंटी स्लीवलेस मैक्सी पहनी थी, वो क्या ग़ज़ब दिख रही थी? फिर हम दोनों बैठकर बात करने लगे और फिर वो मेरे लिए जूस बनाकर लाई और जैसे ही मुझे जूस का गिलास देने के लिए झुकी तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी। अब उनके बूब्स मानो मेरे सामने झूल रहे थे। फिर मैंने जैसे तैसे करके अपने आपको संभाला और जूस पीकर आंटी से कहा कि में बाथरूम जाता हूँ। अब बाथरूम में जाते ही मुझे आंटी की पेंटी और ब्रा पड़ी हुई मिली और उसे सूँघकर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मुठ मारने लगा। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर कुछ देर के बाद उसकी बेटी आई और बात करते-करते ऐसे ही शाम हो गयी। फिर आंटी ने मुझे बोला कि बेटा अंकल भी नहीं है और तू अकेला घर में क्या करेगा? यहीं रुक जा, तो में झट से मान गया। फिर मैंने उसकी बेटी को पढ़ने में थोड़ी मदद की, फिर हम लोगों ने साथ में डिनर किया और फिर उसकी बेटी सोने चली गयी। अब दोनों टी.वी देखने बैठ गये, तो उसी वक़्त आंटी ने कहा कि तू कितना टी.वी देखता है रे? चल आंटी से थोड़ी बात भी कर ले, फिर मैंने हल्की सी स्माइल दी और बातें करने लगा। अब बातें करते-करते मैंने पूछा कि आंटी आप तो अभी भी इतनी सुंदर हो, तो आंटी के कहा कि कहाँ तेरे अंकल तो मुझे कुछ समझते ही नहीं है और सारा वक़्त काम में लगे रहते है। तब मैंने आंटी से कहा कि आप ऐसा क्यों कह रही है? और उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया, वाह्ह उनकी स्किन कितनी मुलायम थी।

फिर उनकी आँखे नम हो गयी और वो अपने दुःख की बात करने लगी, तो मैंने उन्हें समझाते हुए हग किया और उनकी जाँघो पर अपना हाथ फैरा तो फिर उन्होंने मेरा हाथ हटाते हुए कहा कि ये ग़लत है, तू ये अपनी आंटी के साथ कैसे कर सकता है? तो अब मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने उन्हें बोल दिया कि आंटी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो और जब भी में आपको देखता हूँ तो में जैसे पागल सा हो जाता हूँ और इतना सुनते ही आंटी खड़ी हो गयी और अंदर अपने बेडरूम में चली गयी। फिर में भी उनके पीछे-पीछे गया और उन्हें ज़ोर से पकड़ कर किस करने लगा। अब पहले तो वो मना कर रही थी, लेकिन बाद में अब वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर हम दोनों ने लिप किस किया और जैसे हम लोग लॉक ही हो गये थे। फिर मैंने आंटी को बिस्तर पर सुलाया और किस करते-करते उसके बूब्स को मसलने लगा, अब वो मुझे पकड़ कर किस कर रही थी।

अब में उनके बूब्स को बाहर निकालने के लिए उतावला हो रहा था, फिर में धीरे से थोड़ा नीचे गया और उनके क्लीवेज को क़िस करने लगा। अब वो बहुत गर्म हो चुकी थी, फिर मैंने उनकी मैक्सी को ऊपर उठाया और उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। अब में ज्यादा देर तक रह नहीं पाया और उसकी ब्रा को फाड़ कर फेंक दी और अब उनके दोनों बूब्स मेरे सामने थे। फिर मैंने उनके निपल को अपने मुँह में लिया और चूसता रहा। फिर कुछ देर के बाद में उनके नीचे गया और उनकी पेंटी को निकाल फेंका। अब उसकी चूत गर्म हो चुकी थी और फिर में उसे सक करता गया, तो वो चिल्लाने लगी। शायद अब उनसे और सहन नहीं हो रहा था। फिर मैंने अपनी पेंट खोली और अपना 6 इंच लंबा लंड उनकी चूत में अंदर घुसा दिया। अब हम दोनों ने लगभग 2 घंटे तक सेक्स किया और उस दिन के बाद से हमें जब भी मौका मिलता है तो हम सेक्स करते और मजे लूटते है ।।

धन्यवाद …

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