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नौकरानी की कुंवारी चूत का मजा

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प्रेषक : मनोज …

हैल्लो दोस्तों, में 30 साल का हूँ और मेरा लंड चोदने के लिए तड़पता रहता है। में अपनी बीवी को चोद-चोदकर कुछ नया खोज रहा था। हमारे घर में पार्ट टाईम नौकरानियाँ काम करती है, लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी। मेरी बीवी बड़ी होशियार थी, वो सब काली और भद्दी चुनकर रखती थी। वो जानती थी ना कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है। फिर आख़िर में जब कोई नहीं मिली तो एक को रखना ही पड़ा, जो कि 20 साल की मस्त जवान कुँवारी लड़की थी, सावला रंग था और क्या जवान सुंदर ऐसी कि देखकर ही लंड खड़ा हो जाए। बूब्स ऐसे गोल-गोल और निकलते हुए की ब्लाउज में समाए ही नहीं। बस अब में मौके की तलाश में था, क्योंकि वो चोदने के लिए एकदम मस्त चीज थी। फिर मैंने उसके बारे में सोचकर कई बार मुठ भी मारी और बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कि कब मौका मिले? और कब में उसकी चूत में अपना लंड घुसा दूँ?

अब वो भी अपनी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी और में उसके बदन को चोरी-चोरी से नापता रहता था। फिर मैंने मन ही मन में कई बार उसे नंगा कर दिया था, उसकी गुलाबी चूत के बारे में सोच-सोचकर मेरा लंड कई बार गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फडा रहा होता था और मेरा हाथ मचलते रहते थे कि कब उसकी गोल-गोल चूचियों को दबाऊं? फिर एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानो करंट सा लग गया और वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी। तब मैंने सोचा कि मौका आने दे रानी, तुझे तो खूब चोदूंगा, मेरा लंड तेरी चिकनी चूत में डालकर भूल जाऊँगा और तेरी चूचियों को चूस-चूसकर अपनी प्यास बुझाऊँगा और दबा- दबाकर खूब मज़े लूँगा और तेरे होंठो को तो खा ही जाऊँगा, रानी उसका प्यारा सा नाम था। कहते है ना उसके घर में देर है, लेकिन अंधेर नहीं। फिर एक दिन बीवी ने कहा कि में मायके जा रही हूँ, रानी आएगी तो घर का काम करवा लेना।

जब रविवार का दिन था और बच्चे भी बीवी के साथ चले गये थे और अब मेरे लंड महाराज तो उछल गये थे। अब में यह मौका चूकने वाला नहीं था, लेकिन शुरू कैसे करे? कहीं चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गयी तो? दोस्तों तुम यह जान लो कि लड़कियाँ कितना ही शरमाये, लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हें छेड़े और चोदे। फिर मैंने रानी को बुलाया और उसे देखते हुए कहा कि रानी तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो? तो तब वो बोली कि क्यों साहब? क्या कम है? तो तब मैंने जवाब दिया कि देखो ब्लाउज के नीचे कोई चोली नहीं है, सब दिखता है, तुझे लड़के छेड़ेंगे। तब वो बोली कि बाबू जी इतने पैसे कहाँ है कि चोली खरीद सकूँ? आप दिलवाओगे।

तब मैंने कहा कि दिलवा तो में दूँगा, लेकिन पहले यह बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है। तब उसने जवाब दिया कि नहीं साहब। फिर मैंने कहा कि इसका मतलब तू एकदम कुँवारी है। तब उसने कहा कि जी साहब। फिर मैंने कहा कि अगर में कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज तो नहीं होगी ना? तो तब उसने कहा कि नाराज क्यों होऊंगी साहब? आप तो बहुत अच्छे हो। बस अब मेरे लिए यही उसका सिग्नल था। फिर मैंने हिम्मत करके उससे पूछा कि अगर में तुम्हें थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा ना? तो तब वो अपने पैर की उंगलियों को जमीन पर मसलती हुई बोली कि आप तो बड़े वो हो साहब। फिर मैंने आगे बढ़ते हुए कहा कि अच्छा अपनी आखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं। तब उसने अपनी आखें बंद की और हल्का सा अपना मुँह ऊपर की तरफ कर दिया। फिर मैंने सोचा कि बेटा लोहा गर्म है मार दे हथौड़ा और फिर मैंने आहिस्ता से पहले उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए, हाए क्या गजब की लड़की थी वो? क्या टेस्ट था? दुनिया की कोई भी शराब उसका मुक़ाबला नहीं कर सकती थी, ऐसा नशा छाया कि मेरे सब्र के सारे बाँध टूट गये थे।

फिर मेरे होंठो ने कसकर उसके होंठो को चूसा और चूसते ही रहे। अब मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया था। अब मेरी जीभ उसकी जीभ का टेस्ट लेने लगी थी और इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा और बस मज़ा लेती रही। फिर अचानक से उसने अपनी आखें खोली और बोली कि साहब जी बस, कोई देख लेगा। तब मैंने कहा कि रानी अब तो मत रोको मुझे, सिर्फ़ एक बार। तब उसने कहा कि एक बार क्या साहब? फिर मैंने उसके कान के पास जाकर कहा कि चुदवाएगी? एक बार अपनी चूत में मेरा लंड घुसवाएगी? देख मना मत करना, तू कितनी सुंदर है? और यह कहकर मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और अपने दाहिने हाथ से उसकी बाई चूची को दबाने लगा था।

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अब में अपने मुँह से उसके गालों पर, गले पर, होंठो पर और हर जगह पर पागलों की तरह चूमने लगा था, क्या चूची थी? मानो सख्त संतरे हो, दबाओ तो छिटक-छिटक जाए, उफ वो पूरी की पूरी मलाई थी। फिर रानी ने उखड़ी साँसों से जवाब दिया कि साहब जी मैंने यह सब कभी नहीं किया है, मुझे शर्म आ रही है। फिर मैंने कहा कि हाए मेरी जान, रानी बस इतना बता अच्छा लगा या नहीं? मज़ा आ रहा है कि नहीं? मेरा तो लंड बेताब है जानेमन और अब मत तड़पा। फिर उसने कहा कि साहब जी जो करना है जल्दी करो, कोई आ जाएगा तो? बस फिर मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लेटा दिया। फिर मैंने कसकर चूमते हुए उसके कपड़ो को उतारा और फिर अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला और मेरा 8 इंच लंबा लंड फड़फडाते हुए बाहर निकल गया, जिसे देखकर उसकी आखें बड़ी हो गयी थी और बोली कि हाए यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है। फिर मैंने कहा कि पकड़ ले इसे मेरी जान और यह कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब उसके बदन को पहली बार नंगा देखकर तो मेरा लंड ज़ोर-जोर से उछलने लगा था। उसकी चूचियाँ इतनी मस्त थी कि पूछो मत, उसकी चूत पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे और वो इतनी अच्छी लग रही थी कि मेरे हाथ उसकी तरफ बढ़ ही गये थे, क्या गर्म चूत थी उसकी? फिर मैंने अपनी एक उंगली आहिस्ता से उसकी चूत के अंदर घुसा दी, उसकी चूत में से रस बह रहा था और उसकी चूत गीली हो गयी थी। फिर मैंने उसकी गुलाबी-गुलाबी चूत को अपनी उंगलियों से अलग किया और फिर मैंने अपना लंड आहिस्ता से उसकी चूत में अंदर घुसाया। अब मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे और में अपने मुँह से उसके होंठो को चूस रहा था। तब उसने कहा कि आह साहब जी आहिस्ता लग रहा है। फिर मैंने कहा कि रानी मज़ा आ रहा है ना? तो तब उसने कहा कि साहब जी जल्दी करिए ना जो भी करना है। फिर मैंने कहा कि हाए मेरी जान बोल क्या करूँ? तो तब उसने कहा कि डालिए ना, कुछ करिए ना। फिर मैंने कहा कि रानी बोल क्या करूँ? और यह कहते हुए मैंने अपने लंड को थोड़ा और घुसाया। फिर उसने कहा कि अपना यह डाल दीजिए। फिर मैंने कहा कि बोल ना कहाँ डालूं मेरी जान? क्या डालूं?

फिर उसने कहा कि आप ही बोलिए ना साहब जी, आप अच्छा बोलते है। फिर मैंने कहा कि अच्छा यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी चूत में घुस गया और अब ये तुझे चोदेगा। फिर उसने कहा कि चोदो ना साहब जी। अब उसके मुँह से ऐसे शब्द सुनकर तो मेरा लंड और भी मस्त हो गया था, हाए रानी क्या चूत है तेरी? क्या चूचियाँ है तेरी? इन्हें इतने दिन से कहाँ छुपाकर रखा था? तूने पहले क्यों नहीं चुदवाया? तो तब उसने कहा कि साहब जी आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है, बस जल्दी से चोद दीजिए और फिर उसने अपने चूतड़ ऊपर कर लिए। फिर मैंने उसकी दाहिनी चूची को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा और अपने एक हाथ से उसकी दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना लंड उसकी चूत में डालना चालू किया।

अब उसने अपनी आँखे बंद कर ली थी। फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक भी लगा लिया और अपने लंड को और अंदर और अंदर धकेलता रहा। अब उसने अपने होंठ अपने दाँतों में कसकर दबाए हुए थे, लेकिन वो चीखी नहीं। फिर में कुछ देर तक ऐसे ही अंदर बाहर आराम से करता रहा। अब वो भी दर्द कम ही महसूस कर रही थी। अब में उछल-उछलकर ज़ोर-ज़ोर से उसको चोदने लगा था। आह अब मुझे क्या जन्नत का मज़ा आ रहा था? ऐसा लग रहा था बस इस प्यारी-प्यारी चूत को चोदता ही रहूँ, चोदता ही रहूँ। अब मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से उसकी गुलाबी, गीली, गर्म-गर्म चूत को चोद रहा था। फिर मैंने उससे कहा कि हाए रानी चुद रही है ना, बोल मेरी जान बोल। फिर उसने कहा कि हाँ साहब चुद रही है, बहुत मज़ा आ रहा है साहब, आप बहुत अच्छा चोदते है, यह मेरी चूत आपके लंड के लिए ही बनी है, साहब मेरी चूचियों को ज़ोर से दबाओ ना, साहब, ऊऊओ, मज़ा आ गया, ऊऊहह।

फिर अचानक से हम दोनों साथ-साथ ही झड़ गये। फिर मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी-प्यारी चूत में निकाल दिया, हाए क्या चूत थी? क्या लड़की थी? गर्म-गर्म हलवा, नहीं उससे भी ज़्यादा टेस्टी थी। फिर मैंने पूछा कि रानी तेरा महीना कब हुआ था? तो तब वो शरमाते हुए बोली कि परसों ही खत्म हुआ है, आप बड़े वो है, यह भी कोई पूछता है क्या? तो तब मैंने उसको बाँहों में भरकर उसके होंठो को चूमते हुए उसकी चूचियों को दबाते हुए कहा कि मेरी जान चुदवाते-चुदवाते सब सीख जाएगी। अब हम एकदम सुरक्षित थे, अभी प्रेग्नेंट होने का कोई चान्स नहीं था। दोस्तों कह नहीं सकता। फिर दूसरी बार जब मैंने उसे चोदा तो पहली बार से ज़्यादा मज़ा आया था, क्योंकि लंड भी देर से झड़ा था और उसकी चूत भी गीली थी। अब वो साली अपने चूतड़ उछाल उछालकर चुदवा रही थी। अब मैंने उसकी चूचियों को तो मसल-मसलकर और चूस-चूसकर पूरा निचोड़ ही दिया था, पता नहीं फिर जाने कब मौका मिले? आज इसकी चूत चूस ही लो। उसकी चूत का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि किसी भी शराब में ऐसा नशा नहीं है।

अब चोदते समय तो मैंने उसके होंठो को खा ही लिया था और उससे बोला कि ले मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान, तेरी चूत में मेरा लंड है, इसी को चुदाई कहते है रानी, कहाँ छुपा रखी थी यह चूत जानी? और यह कहते हुए में बस उसको चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था। फिर उसने भी जवाब दिया कि चोद दीजिए साहब जी, चोद दीजिए मेरी चूत को, चोद दीजिए और यह कह-कहकर वो मजे से चुदवा रही थी। दोस्तों फिर चुदाई तो खत्म हुई, लेकिन मेरा मन नहीं भरा था तो तब मैंने उसको दबोचते हुए कहा कि रानी मौका निकालकर चुदवाती रहना, यह लंड तेरी चूत का दीवाना है, में तुझे मालामाल कर दूँगा जानेमन और यह कहकर मैंने उसे 500 रुपए दिए। फिर आगे भी जब कभी भी मुझे कोई मौका मिला, तो मैंने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया और खूब जमकर उसकी चुदाई की और अब वो भी बहुत खुश है और अब उसे पैसा और प्यार दोनों मिल रहे थे ।।

धन्याद …

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