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मम्मी ने चुदाई का खिलाड़ी बनाया

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प्रेषक : राकेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राकेश है और में महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 25 साल है, में एक एड-एजेन्सी में काम करता हूँ। आप तो जानते ही है कि एड एजेन्सी में दिन रात काम होता है, में अक्सर रात को लेट 1-2 बजे आता हूँ और कभी कभी तो मुझे पूरी रात भी काम करना पड़ता है। में हमेशा ऑफिस से आने के बाद नहाता हूँ और बाद में खाना ख़ाता हूँ। में कितना भी लेट आऊं? मेरी माँ मुझे खाना परोसती है। मेरी माँ का नाम पुष्पा है, उसकी उम्र 50 साल है और वो काली है, थोड़ी मोटी और उसकी हाईट सिर्फ 4 फुट 9 इंच है। मेरी हाईट 6 फुट है और में भी काला हूँ, मेरे दो बहनें है उनकी शादी हो चुकी है। अब बस हम तीनों ही घर में रहते है, लेकिन में जब भी ऑफिस जाता हूँ, तो मेरे पापा हमेशा सोए हुए रहते है और में जब रात को घर आता हूँ, तो तब पापा घर में नहीं होते है।

यह एक दिन की बात है में ऑफिस से लेट आया था। अब में रोज की तरह नहाने वाला था, तो तभी माँ ने आवाज दी और बोली कि राकेश तेरे नहाने का पानी तैयार है। तो में बाथरूम में गया और तभी माँ को याद आया कि उसने मुझे बहुत ही गर्म पानी दिया है। तो माँ बोली कि अरे राकेश थोड़ी देर रुक, में तुझे ठंडा पानी परोसती हूँ। मेरी माँ ने साड़ी पहनी थी। मेरा बाथरूम बहुत छोटा है वो दो आदमियों से ही भर जाता है। अब में अंदर था और माँ बाथरूम में आ गई थी। अब में अंडरवियर पहने था, लेकिन मैंने माँ आने वाली थी इसलिए टावल भी पहनकर रखा था। फिर माँ अंदर आई, अब में माँ के पीछे खड़ा था। फिर माँ मेरे सामने झुकी और अब उसका मुँह उस तरफ था और उसकी गांड मेरी तरफ थी।

अब वो मेरे लिए पानी परोस रही थी और ठंडा पानी गर्म पानी में डाल रही थी। तभी उसकी गांड मेरे लंड को लगी तो मुझे थोड़ी शर्म आई इसलिए में थोड़ा पीछे आया, लेकिन वो फिर से थोड़ी पीछे आई और उसकी गांड मेरे लंड को लगने लगी। अब मेरा लंड 180 डिग्री खड़ा था, क्योंकि में हमेशा ऑफिस में सुंदर लडकियां देखकर उनकी याद में बाथरूम में मेरा लंड हिलाता था। फिर माँ ने पानी परोसा और वो बाहर चली गई और जाते-जाते उसने मेरी तरफ देखा और स्माइल दी। फिर कुछ दिन तक ऐसा ही होता रहता था। अब माँ हमेशा किसी ना किसी बहाने से बाथरूम में आती थी और हमेशा वो उनकी गांड मेरे लंड को लगाने की कोशिश करती थी। अब में भी समझ गया था, शायद माँ को मेरा लंड टच होना अच्छा लगता है। फिर एक दिन में बाथरूम में था, तो तभी माँ फिर से अंदर आई। अब मैंने मेरे ऊपर पानी डाला ही था, अब में भीगा हुआ था। तो तभी माँ बोली कि अरे राकेश और ये गर्म पानी ले, तो में उठकर खड़ा हुआ।

फिर माँ हमेशा की तरह आगे आई और झुकी, तो फिर से उसकी गांड मेरे लंड को लगने लगी। तो इस बार मैंने सोचा कि में टावल नहीं पहनूंगा। अब में वैसे ही अंडरवेयर में खड़ा था और फिर में जानबूझकर थोड़ा आगे आया और फिर मैंने मेरा लंड माँ की गांड से टच किया तो तब वो भी पीछे आई और उसकी गांड मेरे लंड को टच करने लगी। अब में जब भी खाना खाने बैठता था तो तब माँ मुझे खाना परोसती थी। अब हम दोनों ही रोज रात को अकेले होते थे, वो हमेशा रात को पारदर्शी साड़ी पहनती थी ताकि में उसके बूब्स देख पाउँ। अब जब भी वो मुझे खाना परोसती, तो तब मुझे उसके बूब्स आसानी से देखने को मिलते थे, कभी-कभी उसकी साड़ी का पल्लू अगर टाईट होता तो वो फिर से उसे ढीला करके अपनी साड़ी ऐसे करती थी कि मुझे उसके बूब्स दिखाई दे। फिर उस रात खाना ख़ाने के बाद माँ ने कहा कि राकेश आज तो मेरे साथ ही सो जा।

फिर हम दोनों सोने चले गये। अब में माँ के बाजू में ही सोया था। फिर 1 घंटे के बाद मैंने मेरा एक हाथ माँ की कमर पर रख दिया। अब माँ का मुँह उस तरफ था। फिर में थोड़ा आगे गया और माँ को अपने से और चिपका लिया। अब मेरा लंड माँ की गांड को टच करने लगा था। फिर मैंने धीरे-धीरे मेरा एक हाथ माँ के बूब्स पर रखा और उन्हें सहलाने लगा। अब मुझे लगा था कि माँ सो गई है, लेकिन वो सोने का नाटक कर रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे मेरा एक हाथ माँ के पेट से घुमाकर माँ की साड़ी में डाला तो अचानक से माँ ने मेरा एक हाथ पकड़ा और बोली कि क्या कर रहा है? और वो सीधी हो गई। अब में बहुत घबरा गया था, लेकिन माँ बोली अब तू जवान हो गया है चल तेरी शादी करेंगे, कोई लड़की देखी है कि नहीं अपने ऑफिस में, तो बता तेरी शादी करेंगे या किसी के साथ कुछ किया है? तो में बोला कि क्या किया है? तो तभी माँ बोली कि क्या अब वो भी बताऊँ कि जवान लड़के इस उम्र में क्या करते है? तो में बोला कि में अनुभव लिए बगैर शादी नहीं करूँगा, मैंने तो अभी कुछ भी अनुभव लिया ही नहीं है।

फिर माँ बोली कि अनुभव कौन सी बड़ी चीज है? आ में तुझे सिखाती हूँ। अब उस रात उजाला कम था तो मुझे थोड़ा सा ही दिख रहा था। फिर माँ ने कहा कि चल अब अपने कपड़े उतार तो मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए और बोला कि अब। फिर माँ ने कहा कि आ अब मेरे ऊपर चढ़ जा। तो में माँ के ऊपर चढ़ गया। फिर माँ ने अपनी साड़ी ऊपर की और अपनी चड्डी निकाल दी और मेरा लंड अपने एक हाथ में पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और बोली कि चल अब मुझे झटके दे। फिर मैंने माँ को झटके देना चालू किया। अब में इतना उत्तेजित था कि मेरा लंड ना पूरा जाता था और ना में ठीक से झटके दे पा रहा था और उसी वक़्त उत्तेजना की वजह से मेरा पानी माँ की चूत में गिरने की वजह से माँ की चूत मेरे पानी से भर गई थी।

फिर में उठा और अब में निराश था। तभी माँ ने कहा कि कोई बात नहीं अगले टाईम तू जरूर अच्छा करेगा, आज तेरा पहला टाईम है, में तुझे सिखाऊँगी, लेकिन एक बात याद रखना आज बुधवार है शनिवार को तो खुद करेगा, में नहीं बताउंगी। फिर बुधवार से शुक्रवार रात तक वो मुझे सिखाती रही और फिर उस रोज शनिवार आया। अब हम नीचे के रूम में सो गये थे। फिर मैंने माँ के माथे पर किस किया और धीरे-धीरे माँ के गालों पर, माँ के होंठो पर, माँ की गर्दन पर और फिर में धीरे-धीरे नीचे आया और माँ का ब्लाउज खोला और उसके बूब्स को चूसने लगा, चाटने लगा और काटने लगा। फिर मैंने अपना एक हाथ माँ की साड़ी में डाला और माँ की पेंटी में अपना एक हाथ डालकर माँ की चूत तक ले गया। तो तभी माँ जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी आआ, आआआ, हाईईईई और करो, आआ। अब उसकी सांसे तेज होने लगी थी और उसकी आवाज़े भी ऊम्म्माआह माँ, आह, ऊऊऊ और फिर अचानक से वो बोली कि अब तो डाल ना रे, हाईई, लेकिन में नहीं मान रहा था, अब में वही कर रहा था।

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फिर अचानक से मेरा ध्यान सीढ़ियों पर गया और बोला कि चल हम ऊपर के कमरे में करेंगे। तो माँ ने भी हाँ बोला। फिर हम उठे और माँ ऊपर गई और बोली कि तू नीचे ही रुकना और जब तक में ना बोलूं तब तक ऊपर मत आना। फिर मैंने नीचे ही मेरे कपड़े उतारे और में टावल में ही रहा और अब में माँ का बुलाने का इंतज़ार कर रहा था। फिर माँ ने आवाज दी तो में ऊपर गया तो मैंने देखा तो माँ एक कोने में दीवार से चिपककर खड़ी थी। अब उसका मुँह उस तरफ था, अब उसने उसके बूब्स पर टावल और नीचे कमर पर यानि नाभि के भी नीचे टावल पहना था। फिर में माँ के पास गया तो माँ ने मेरी तरफ देखा, उस वक़्त माँ एक कामदेवी लग रही थी। फिर में माँ के पास गया और उसको चूमने लगा और चाटने लगा और चूमते-चूमते नीचे आया और माँ की नाभि चाटने लगा। फिर में फिर से खड़ा हुआ और माँ के बूब्स दबाने लगा और अपना एक हाथ माँ के नीचे टावल में डालकर माँ की चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा तो पहले एक और फिर बाद में दो और तीन उंगलियाँ माँ की चूत में डाल दी। तो तभी माँ जोर से चिल्लाई उउउम्म्म्ममम, हाईईईई, बस कर, अब धक्के लगा, अब मुझसे रहा नहीं जाता, आह, आह, लेकिन में नहीं मान रहा था। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब माँ की चूत से पानी निकल रहा था। अब माँ और भी तड़पने लगी थी अब लगाआअ रे, हाईई। तो तभी मैंने माँ से पूछा कि माँ क्या में आपको नाम से पुकार सकता हूँ? तो तभी माँ भी बोली कि हाँ तू मुझे नाम से पुकार सकता है और में तुझे इज्जत देकर पुकारूंगी ( जैसे एक औरत अपने पति को पुकारती है वैसे) फिर जैसे ही में माँ के बूब्स दबाता था और उसकी चूत में अपनी उंगलियाँ डालता था। तो तब माँ बोलती थी अजी हाइईई अब बस भी कीजिए, आप मुझे ऐसे मत तरसाओ, अब डाल भी दो और कितना तरसाओगे? हाई क्या मेरी चूत का पूरा पानी निकलोगे क्या? मेरी हाईट 6 फुट और माँ की हाईट 4 फुट 9 इंच थी।

अब हम खड़े-खड़े ठीक से कर नहीं सकते थे तो तभी मेरा ध्यान कोने में गया, कोने में एक पलंग था। तो में माँ को वहाँ लेकर गया और बोला कि पुष्पा चल पलंग पर चढ़ जा, तो माँ पलंग पर चढ़ गई। फिर में माँ को पलंग के कोने में लेकर गया और उसके हाथ दीवार पर रखने को बोला और पलंग पर अपने घुटने पर बैठने को बोला। अब माँ का मुँह उस तरफ था और माँ की गांड मेरी तरफ थी। अब हम घर के कोने में पलंग के ऊपर थे। अब माँ ने अभी भी अपने बूब्स पर और नीचे टावल पहना था और में भी टावल पहने था। फिर में भी माँ के पीछे अपने घुटने पर बैठ गया। तब माँ बोली कि आप क्या सोच रहे हो? अब में माँ की गांड पर अपने हाथ घुमा रहा था और उसे सहला रहा था और बोला कि पुष्पा आज में तेरी गांड मारूँगा। फिर माँ बोली कि हाँ जी, लेकिन थोड़ा धीरे से नहीं तो आपकी बड़ी तलवार से मेरी गांड फट जाएगी।

फिर मैंने माँ के नीचे का टावल ऊपर किया और मेरा लंड बाहर निकाला और माँ के गांड के छेद पर रखकर झटके देने लगा, लेकिन वो नहीं जा रहा था। तभी माँ बोली कि अजी आप तेल लगाओ और फिर करो। तो फिर में नीचे के रूम में गया और तेल लेकर आया। फिर मैंने थोड़ा तेल मेरे लंड पर लगाया और माँ की गांड में भी थोड़ा तेल डाला। अब मैंने इतना तेल डाला था कि माँ की गांड पूरी तेल से भर गई थी। फिर में बोला कि पुष्पा मेरी जान अब तैयार हो जा। तभी माँ बोली कि प्लीज थोड़ा धीरे, नहीं तो मेरी गांड फट जाएगी, मुझे आपका बहुत डर लग रहा है। तभी मैंने एक ज़ोर से झटका दिया। तो माँ जोर से चिल्लाई ऊऊऊओ, आआईई, गययययययया, लेकिन में नहीं माना और ज़ोर से झटके देने लगा, लेकिन पहले ही झटके में मेरा लंड माँ की गांड में आधा घुस गया था।

फिर तभी माँ चिल्लाई हाईई, हाईई, तेरे लंड का मुँह बहुत बड़ा है, हाईईईईई ये बहुत मोटा है, हाईईईईईईई, साले निकाल, मेरी गांड फट गई है। फिर मैंने अपने झटके और ज़ोर से दिए और बोला कि पुष्पा क्या बोला तूने? तो तभी मैंने माँ को समझाया मैंने आपकी बजाई तो तू साले बोली। तभी माँ बोली कि आआआआअ माफ़ कर दे, मुझसे गलती हो गई, मैंने आपको तू बोला, प्लीज, लेकिन थोड़ा धीरे करो, आआआआ, एक तो आपकी हाईट 6 फुट है और आपका यह 7 इंच का है, मेरी हाईट तो 4 फुट 5 इंच ही है, आआआअ, प्लीज थोड़ा धीरे करो, मेरी चूत फट जाएगी। अब बाहर तूफ़ानी बारिश हो रही थी और में अंदर तूफान बन गया था। अब में ज़ोर-जोर के झटके दे रहा था और माँ चिल्ला रही थी आआआअ, उउआ, प्लीज, सस्स्स्स्सस्सस्स, धीरे, में मर गई, आआआअ और धीरे, आआआ, हाईईईईई, आआआआ, धीरे। फिर मेरे झटके बढ़ते गये और मेरा लंड आधे से भी ज्यादा माँ की गांड में घुस गया था। फिर मैंने अपने झटके थोड़े धीरे किए तो माँ ने कहा कि क्या हुआ? रुक क्यों गये? तो में बोला कि तुझे तकलीफ़ हो रही है ना, तो माँ ने कहा कि लेकिन मज़ा भी आ रहा है।

फिर मैंने फिर से अपने झटके तेज-तेज देने शुरू किए तो माँ फिर से चिल्लाने लगी। अब मेरा लंड माँ की गांड में पूरा घुसने लगा था। फिर माँ चिल्लाने लगी आआआआ, अब डाल दो मेरी जान, आआआअ, उह, आअ, अब में और नहीं सह सकती, तो तभी मैंने माँ को ज़ोर से पकड़ा और ज़ोर से अपना आखरी झटका मारा तो मेरा सफेद पानी माँ की गांड में घुस गया। फिर माँ बोली कि आआ तेरे में क्या गर्मी है? हाईईईई, एयाया, बहुत अच्छा लगा, तेरा तो बहुत ही पानी हाईईईई निकल रहा है, आआमम्म्मम। फिर थोड़ी देर के बाद हम वैसे ही सो गये। फिर 1-2 घंटे के बाद माँ की फिर से नींद खुली। अब में सोया था, तो तभी माँ का एक हाथ मेरे चड्डी में जा रहा है ऐसा मुझे महसूस हुआ और फिर मैंने हल्की सी मेरी आँखें खोली तो तभी मैंने देखा तो माँ का एक हाथ मेरे चड्डी में था। फिर में उठा तो माँ ने बोला कि आपने अपने आपको शांत किया, लेकिन मुझे कब शांति दोगे? चलो अब में जैसे बोलती हूँ वैसा करो, मेरी चूत को भी शांत करो।

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फिर में उठा और माँ को फिर से चाटने लगा और उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा। तभी माँ जोर-जोर से सिसकियाँ लेने लगी आआआआअ, उउउम्म्म्मम, कितना तड़पाएगा? आआ, उूउउ, अरे धक्के लगा, क्या मेरी चूत का पानी ख़त्म करेगा? तभी में उठा और माँ के दोनों पैर मेरे कंधे पर रख लिए और उसे अपने पेट पर सोने को बोला। फिर मैंने मेरा लंड निकाला और माँ की चूत पर लगाया और ज़ोर से माँ को एक झटका लगाया। तभी माँ जोर से चिल्लाई आह, हाईईईई माँ, आअ माँ, आअ माँ, आअ, आआ, एम्म, हाईईईईईईईई, आआ, उूउउ, आपका बहुत बड़ा है, आआआआआ। अब धीरे-धीरे मेरे झटके और बढ़ने लगे थे और माँ और चिल्ला रही थी एम्म, आह, ऊऊऊ, बहुत तकलीफ हो रही है, लेकिन अच्छा लग रहा है, इसस्स्स्स्स, आआअ।

अब वो भी नीचे से उसकी कमर हिला-हिलाकर मेरा साथ दे रही थी आआआआ, उूउउम्म्म्मम, हाईईईई। तभी मैंने ज़ोर से एक झटका मारा और में और तेज-तेज झटके मारने लगा। तभी माँ ने कहा कि हाँ बहुत मजा आ रहा है, आआआ, उूउउ, म्‍म्म्मम। अब में ज़ोर-जोर से झटके दे रहा था और बोला कि और क्या पापा नहीं करते? तो तभी माँ बोली कि एयाया तेरे पापा रात को आते नहीं, कहाँ होते है? आ एम्म सब जानते है? तो मैंने कि कहाँ होते है? तो माँ ने कहा कि वो लेडीस बार में जाते है, मार मुझे और ज़ोर के झटके दे, हाईई और मुझे शांति दे, में घर में अकेली रहकर थक गईईईईईई हूँ, आअम्म्म, तो मुझे ये सुनकर शॉक लगा, अब में तेज-तेज झटके दे रहा था और हर बार की तरह मैंने एक आखरी झटका दिया तो मेरा पानी माँ की चूत में गिर गया। फिर माँ बोली कि आआआआआ अब अच्छा लग रहा है, हाईईईईई, आआआआआअ, तुझे सिखाया और तूने तो आज मस्त चुदाई की, आज से में तेरी, अब तेरे पापा को जाने दे, आज से हर रात तू और में, अब आप मेरे पति है और में आपकी पुष्पा, आज कई सालों के बाद मुझे तृप्ति मिली है और फिर हम एक दूसरे से चिपककर सो गये। फिर हम दोनों ने खूब चुदाई की और खूब मजा किया ।।

धन्यवाद …

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