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कुंवारी चूत के साथ कामसूत्र

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प्रेषक : विजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विजय है। मेरे पड़ोस में एक फेमिली रहती थी, उनकी फेमिली में अंकल, आंटी और उनका एक लड़का और दो लड़कियाँ थी। उनके यहाँ हमारा आना जाना बहुत था, हम लोग अक्सर एक दूसरे के घर में आते जाते रहते थे। उनकी बड़ी लड़की बहुत सुंदर थी, लेकिन छोटी लड़की ठीक ठाक थी। अब बातों-बातों में उनकी छोटी वाली लड़की मुझे पसंद करने लगी थी और मेरा बहुत ख्याल रखती थी। एक बार हम लोग मेरे घर में एक साथ खेल रहे थे, तो खेल-खेल में मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और ज़ोर से उसकी मुट्ठी में कुछ चीज लेने की कोशिश की तो इसी कोशिश में मेरे हाथ से उसकी चूची दब गयी, तो मुझे बहुत मज़ा आया, लेकिन उसने भी मुझसे कुछ नहीं कहा और हम थोड़ी देर तक ऐसे ही उलझे रहे। फिर इस दौरान मैंने उसकी चूचीयों को अच्छी तरह से दबाया, तो मुझे लगा कि उसे भी मज़ा आ रहा है, इसलिए वो कुछ नहीं बोल रही है। अब में मन ही मन उसे चोदने का प्लान बना रहा था।

फिर कुछ दिन के बाद मेरे घर के सभी मेंबर एक शादी में पटना चले गये और में घर पर अकेला रह गया। फिर पड़ोस वाली आंटी ने कहा कि मम्मी जब तक नहीं आए तब तक यहीं खाना खा लेना, लेकिन मेरे अंदर का शैतान कुछ और ही खाने की सोच रहा था। फिर रात को में उनके घर खाना खाने चला गया और फिर सभी ने खाना खाकर ताश खेली। फिर उनकी छोटी वाली लड़की जिसका नाम रोशनी था, वो मेरे पास बैठी थी और में बेड पर पर जमीन पर रखकर बैठा था। तो बातों-बातों में मेरा पैर उसके पैर से सट गया, तो हम दोनों ने ही पैर नहीं हटाया। फिर धीरे-धीरे में उसके पैर को अपने पैर से सहलाने लग गया, तो उसने इसका बिल्कुल भी विरोध नहीं किया।

फिर बहुत देर तक यही सब चलता रहा और फिर सब सोने की तैयारी में लग गये और फिर में अपने घर चला गया। फिर सुबह मेरे दरवाज़े पर घंटी बजी तो मैंने देखा कि बाहर रोशनी खड़ी थी। फिर मैंने उससे कहा कि अंदर आ जाओ। तो वो बोली कि माँ नाश्ते के लिए बुला रही है। फिर मैंने कहा कि 2 मिनट बैठो, में साथ में ही चलता हूँ, तो वो मान गयी। फिर उसने पूछा कि रात को अकेले नींद आ गयी थी क्या? तो मैंने कहा कि नहीं अच्छी तरह से नहीं आई, इतने बड़े घर में अकेले अच्छा नहीं लगता। तो वो बोली कि तो तब रात कैसे गुजरी? फिर मैंने मौका देखकर तीर छोड़ दिया और कहा कि तुम्हारे बारे में सोचते-सोचते। फिर उसने कहा कि आप बहुत वो हो। तो मैंने पूछा कि वो क्या? तो वो सहमकर बोली कि मुझे पता नहीं। फिर मैंने उससे पूछा कि में उसे अच्छा लगता हूँ क्या? तो वो बोली कि पता नहीं।

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फिर तब मैंने कहा कि तुम्हें कुछ पता है कि सब मुझे ही बताना होगा और बात करते-करते मैंने उसकी कलाई पकड़ ली और अपनी बाहों में भर लिया। फिर वो थोड़ी सी हिचकिचाई और बोली कि ये क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि तुम्हें सब कुछ बताना चाहता हूँ जो तुम नहीं जानती हो। फिर वो हँसने लगी और बोली कि मम्मी आ गयी तो तुम्हें सब समझा देगी। तो मैंने कहा कि अच्छा ठीक है में तुम्हें बाद में समझाऊँगा। फिर दोपहर में रोशनी बाहर से आ रही है, तो मैंने उसे बुलाया और पूछा कि कहाँ से आ रही हो? तो उसने कहा कि कॉलेज से। फिर मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा, तो वो बोली कि माँ ने देख लिया तो। फिर मैंने कहा कि आंटी अभी तुम्हारी बड़ी बहन के साथ मार्केट गयी है और चाबी मुझे तुम्हें देने के लिए कहा है और उन्हें आने में कुछ देर लगेगी, तो वो अंदर आ गयी। फिर मैंने उसे रूम में बैठाया और पानी लाकर दिया। अब वो काफ़ी थकी हुई लग रही, तो मैंने कहा कि थोड़ी देर यहीं आराम कर लो। फिर उसने कहा कि नहीं में घर जाउंगी, मेरे सिर में दर्द हो रहा है, तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं, में यहीं तुम्हारा सिर दबा देता हूँ, तुम घर पर अकेली क्या करोगी?

फिर मैंने अलमारी से बाम निकाली और उसे अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे उसके सिर को दबाने लगा। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। फिर धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसकी गर्दन तक पहुँच गया और अब में उसकी गर्दन और छाती के बीच में अपने हाथों से सहला रहा था। अब उसे मज़ा आने लगा था और में धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ उसकी चूचीयों को सहलाने लगा था और वो अपनी आँखें बंद करके चुपचाप मज़ा ले रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी कुर्ते के बटन खोल दिए और उसकी ब्रा भी खोल डाली। अब में उसके अमरूद जैसी खड़ी चूचीयाँ मसल रहा था, अब वो मस्त होकर ज़ोर-ज़ोर से साँसे ले रही थी। फिर मैंने अपने एक हाथ से मेरी पेंट की चैन खोलकर मेरे 7 इंच के हथियार को बाहर निकाला और उसका हाथ पकड़कर उस पर रख दिया। फिर इस पर वो थोड़ी हिचकिचाई क्योंकि यह उसका पहला मौका था। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में उसकी चूची को अपने मुँह में डालकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। अब वो पूरी तरह से गर्म हो गयी थी और मेरे लंड को मसल रही थी। फिर मैंने धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल डाला और उसकी पेंटी को नीचे की तरफ निकाल डाला और इसके पहले वो कुछ बोलती मैंने उसकी कमसिन चूत को चाटना शुरू कर दिया। अब वो सोच भी नहीं पा रही थी कि ये क्या हो रहा है? अब वो मस्ती में चूर हो गयी थी और बोली कि विजय भैया बहुत मज़ा आ रहा है। तो तब मैंने कहा कि अगर और मज़ा लेना है तो कुछ दर्द सहना होगा, तो वो तुरंत तैयार हो गयी। फिर मैंने मौका देखकर थोड़ी सी क्रीम लगाकर उसकी चूत के मुँह पर मेरा सुपाड़ा रखकर धीरे से एक धक्का दिया तो मेरा सुपाड़ा अंदर जाते ही वो तिलमिला उठी। अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूचीयों को भी चूसना शुरू कर दिया था। फिर कुछ देर में वो नॉर्मल हुई तो मैंने मौका देखकर एक ज़ोर का झटका लगाया।

अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में डूब गया था और वो दर्द के मारे तिलमला रही थी। फिर मैंने कहा कि अगर इस दर्द को सह लिया तो रानी आगे मज़े ही मज़े है। फिर मैंने उससे मीठी-मीठी बातें करनी शुरू कर दी। अब धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो रहा था और अब मैंने धीरे-धीरे धक्के भी लगाना शुरू कर दिया था। अब उसे भी मज़ा आने लगा था और वो भी अपनी गांड उचका रही थी। फिर कुछ देर के बाद उसका मज़ा अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया और अब वो बोल रही थी कि विजय बहुत मज़ा आ रहा है, इसी तरह से करते रहो और इसी तरह से में उसे बहुत देर तक चोदता रहा और फिर खलास होकर उसके ऊपर ही लेट गया। अब वो मुझसे बहुत खुल गयी थी। फिर मैंने उसे मुख मैथुन के बारे में बताया तो वो तैयार हो गयी। अब हम 69 की पोज़िशन में लेट गये थे। अब वो अपने मुँह में मेरा पूरा लंड लेकर धीरे-धीरे चूसने लगी थी। फिर जैसे ही मैंने उसकी चूत को ज़ोर से चाटना शुरू किया, तो वो भी मस्त होकर मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी थी। अब मेरा लंड फिर से तैयार हो चुका था, तो इस बार मैंने उसे कामसूत्र के अलग-अलग तरीक़ो से ऐसे चोदा कि वो सब कुछ भूल गयी और मेरे ऊपर फिदा हो गयी। फिर मेरे घरवाले पटना से लौटे उसके पहले मैंने उसे कम से कम 20 बार चोदा और उसके बाद भी मुझे जब भी कोई मौका मिलता है तो वो मुझसे चुदाने के लिए तैयार रहती है और अब हम दोनों बहुत मजा करते है ।।

धन्यवाद …

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