✽ रोजाना नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ ✽

loading...

दीदी को उसकी मर्ज़ी से चोदा

0
loading...

प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, में चोदन डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ। आप सभी चूत वालियों और लंड वालो को मेरा सलाम। में शहर से दूर फॉर्म हाउस में रहता हूँ और मेरी फेमिली में 6 लोग है। में सबसे छोटा हूँ और मेरे दो बहनें और एक भाई है, मेरी दोनों बहनें बड़ी है। में जब छोटा था तब से में मेरी बड़ी दीदी को देखता था। में जब 10वीं क्लास में था तो तब एक बार मैंने मेरी दीदी को कपड़े बदलते हुए देखा था, वो टॉपलेस थी और उसके बूब्स बड़े-बड़े थे, करीब 32 साईज के होंगे, तब वो Ist ईयर में थी और तब से में उसको देखता था। उसकी गांड इतनी मस्त थी कि क्या बताऊँ? में दीदी को याद करके मुठ मारता था और मैंने सोच रखा था कि में उसको एक ना एक दिन जरूर चोदूंगा, लेकिन मुझे कभी मौका नहीं मिला था। में उसे हमेशा घूरता और उसके बूब्स देखता रहता था।

फिर एक दिन उसकी शादी हो गई। दीदी की शादी के महीने भर के बाद मेरे घरवाले किसी की शादी के लिए सब लोग एक हफ्ते के लिए बाहर गये थे और में अकेला घर में था, इसलिए दीदी घर आ गई, तो घरवाले चले गये थे। फिर मैंने सोचा कि अब 1 हफ्ते में में दीदी को किसी भी हालत में चोदूंगा और फिर मैंने प्लान बनाया। फिर सुबह जब में नहाने गया तो में जानबूझकर कपड़े नहीं ले गया और नहाने के बाद सिर्फ़ टावल पहनकर बाहर आया और दीदी से कहा कि मेरे कपड़े कहाँ है? तो तब दीदी मेरे कपड़े देखने लगी। मैंने मेरे लंड को टावल के छेद में से बाहर निकाला, मैंने पहले से ही टावल में छेद करके रखा था। फिर जब दीदी ने मेरी अंडरवेयर मुझे दी तो मैंने कहा कि इस पर तो चीटियाँ लगी है और फिर में चीटियाँ निकालने लगा। तो तब मेरा 7 इंच का तना हुआ लंड दीदी सलाम कर रहा था। तो दीदी ने उसको थोड़ी देर तक देखा और फिर शर्माकर भाग गई।

फिर बाद में जब दीदी नहाने जा रही थी तो मैंने मेरे मोबाइल से अपने ही घर के फोन पर फोन किया और दीदी को बोला कि प्लीज फोन ले लो। जब दीदी फोन लेने गई तो तब में बाथरूम में जाकर उसके सारे कपड़े लेकर आ गया। अब जब दीदी नहा रही तो तब में बाथरूम के दरवाजे के नीचे से दीदी को नहाते हुए देख रहा था। अब दीदी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और सिर्फ़ उनकी पेंटी बाकी थी। दीदी के बूब्स मस्त बड़े-बड़े थे और उनकी निप्पल अंगूर जैसी थी। फिर दीदी नहाने लगी और जब दीदी ने सब जगह साबुन लगाया और अपनी पेंटी में अपना एक हाथ डालकर अपनी चूत पर भी साबुन लगा रही थी। दीदी ने शायद कभी चूत की शेविंग नहीं की थी, अब मुझे उसकी झांटे साफ नजर आ रही थी।

फिर दीदी पानी डालकर नहाने लगी और थोड़ी देर के बाद दीदी ने अपनी पेंटी में अपना एक हाथ डाला और अपनी चूत को सहलाने लगी थी। अब में समझ गया था कि दीदी गर्म हो गई है। अब दीदी अपनी चूत को सहलाते-सहलाते हांफने लगी थी। अब उसके बूब्स भी अपने रंग में आ गये थे और निप्पल तनकर दूध देने को तैयार थे। अब उसके बूब्स भी पूरे 37-38 साईज के हो गये थे और फिर थोड़ी देर के बाद दीदी ने अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाली और उस पर लगा हुआ पानी चाट गई, लेकिन दीदी ने अपनी पेंटी नहीं निकाली थी। फिर बाद में दीदी नहाने के बाद टावल से अपना बदन पोंछने लगी तो तब में वहाँ से चला गया। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी ने मुझे आवाज़ दी तो में गया। तब दीदी बोली कि मेरे कपड़े दो। तो में कपड़े देखने लगा, लेकिन मिले नहीं ऐसा बोल दिया। तो तब दीदी बोली कि मेरे पास कपड़े नहीं है, मैंने अपने पुराने सारे कपड़े धो दिए है, अब में क्या करूँ? तो तब मैंने कहा कि टावल लपेटकर आ जाओ। तब दीदी बाहर निकली तो दीदी का पूरा बदन टावल से साफ नजर आ रहा था। अब में दीदी को ही देख रहा था। (वो टावल पारदर्शी था)

फिर दीदी बोली कि मेरे कपड़े कहाँ है? तो में दीदी के बूब्स देखता रहा, वो अभी भी अपने पूरे रंग में थी। फिर दीदी रूम में गई तो में भी दीदी के पीछे-पीछे चला गया। तब दीदी बोली कि यहाँ क्या कर रहे हो? तो तब मैंने कहा कि आपको देख रहा हूँ। फिर दीदी ने मुझसे गुस्से में कहा कि में तेरी बहन हूँ और एक ज़ोर का थप्पड़ मेरे गाल पर मारा और मुझे रूम के बाहर निकाल दिया। अब उसके बाद में दीदी से नजर भी नहीं मिला पा रहा था और उससे बात भी नहीं कर रहा था। फिर 2 दिन के बाद दीदी ने कहा कि उनको फोर व्हीलर सीखनी है। तो तब मैंने कहा कि में नहीं सिखाऊँगा। तब दीदी मेरे पास आई और मुझे समझाने लगी कि ये बात गलत है, में तेरी बहन हूँ। तो तब मेरे दिमाग में नया ही ख्याल आया और मैंने कहा कि ठीक है। अब में दीदी को गाड़ी सीखाने के लिए तैयार हो गया था और फिर हम लोग खाली रोड पर गाड़ी ले गये। वो रोड अच्छा था और दोपहर होने कारण वहाँ पर कोई नहीं आता जाता था। अब मैंने पहले से ही मेरी अंडरवियर बाथरूम में निकाल दी थी।

फिर मैंने दीदी को मेरी सीट पर बैठाया और फिर में दीदी की सीट पर बैठ गया और दीदी को गाड़ी चलाने को कहा तो दीदी ने एकदम से गाड़ी तेज भगा दी, तो दीदी डर गई और मैंने हैंड ब्रेक में लगा दिया तो तब दीदी ने कहा कि मुझसे नहीं होगा। फिर तब मैंने दीदी से कहा कि फिर से कोशिश करो। तो दीदी ने फिर से दीदी वैसा ही किया। तब दीदी बोली कि रहने दो, मुझसे नहीं होगा। फिर मैंने दीदी को मेरी सीट बैठाया और में दीदी की सीट पर बैठ गया और फिर दीदी से कहा कि अब में कैसे चलाता हूँ? वो देखो। फिर कुछ दूर जाने के बाद मैंने दीदी से कहा कि अब आप चलाओ तो दीदी नहीं मानी, तो तब मैंने कहा कि एक काम करते है में यहीं पर ही बैठता हूँ और आप मेरे सामने बैठ जाओ। तो तब दीदी ने कहा कि ठीक है।

फिर दीदी ने मेरी तरफ आने के लिए जब दरवाजा खोला तो मैंने मेरी पेंट की चैन खोल दी और अपने लंड को बाहर निकालकर अपनी शर्ट से छुपा दिया। दीदी ने आज सलवार पजामा पहना था। फिर जब दीदी आई तो मैंने उसको मेरी गोद में बैठाया और पीछे होते-होते दीदी का सलवार ऊपर कर दिया और अपनी शर्ट को भी ऊपर कर दिया था। फिर जैसे ही दीदी मेरी गोद में बैठी तो मेरा लंड उसकी गांड को टच होने लगा। तब दीदी ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, उसको लगा कि मेरा लंड पेंट में होगा। फिर मैंने मेरे पैर उसके पैर के नीचे से ऊपर ले लिए, ताकि वो हिल ना सके और फिर गाड़ी स्टार्ट की और चलाने लगे। अब मेरा लंड खड़ा होते-होते उसकी गांड के छेद को टच होने लगा था। अब मेरा लंड बाहर होने के कारण आराम से उसकी गांड सहला रहा था, लेकिन दीदी कुछ नहीं बोली, बोलती तो भी क्या बोलती? फिर बाद में मैंने गाड़ी का स्टेरिंग दीदी के हाथ में दिया और कहा कि अब आप चलाओ और फिर मैंने मेरे दोनों हाथ उसके पैरो पर रखे और धीरे-धीरे सहलाने लगा था।

फिर मैंने धीरे से स्पीड बढ़ानी शुरू की, तो दीदी से गाड़ी कंट्रोल नहीं हुई। फिर मैंने एकदम से ब्रेक मारा और अपने दोनों हाथ जानबूझकर दीदी के बूब्स पर रख दिए और उसके दोनों बूब्स को दबा दिया। अब तक मेरा लंड दीदी की चूत को टच करने लगा था। तब दीदी ने कहा कि अगर तुम ब्रेक नहीं मारते तो हम रोड के नीचे चले जाते। तब मैंने हाँ कहा और दीदी के बोलने के पहले ही उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी निप्पल को ज़ोर से दबा दिया और छोड़ दिया। तब दीदी ने सिसकारी भरी थी, लेकिन दीदी ने कुछ नहीं कहा। अब मेरा लंड अभी भी उसकी चूत को टच कर रहा था। फिर दीदी ने कहा कि चलो अब घर चलते है। तब मैंने दीदी से कहा कि आप गाड़ी चलाते-चलाते चलो। अब दीदी नहीं मान रही थी। फिर भी जब मैंने बहुत रिक्वेस्ट की तो दीदी मान गई, अब दीदी वैसे ही बैठी रही थी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

loading...

फिर मैंने गाड़ी टर्न की और दीदी को चलाने दी और अब मैंने मेरे दोनों हाथों को दीदी के पैरो पर रख दिया था और सहलाने लग गया था और धीरे-धीरे उसकी कमर को भी आगे पीछे करने लगा था। अब में उसके पैरो को सहलाते हुए उसकी जांघो तक आ गया था, लेकिन मेरी उसकी चूत को हाथ लगाने की हिम्मत नहीं हुई थी। अब तक दीदी भी गर्म होना चालू हो गई थी। अब जब हम घर पहुँचने वाले थे, तो तब मैंने कपड़े के ऊपर से ही उसकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से अपने एक हाथ से सहलाया और फिर हम घर पहुँच गये। फिर दीदी कुछ भी ना बोलते हुए सीधी भागती हुई बाथरूम में चली गई और खड़ी-खड़ी अपनी चूत में अपनी एक उंगली डालकर पानी निकालने लगी और चूत का सफेद पानी निकालकर चाटने लगी थी। अब उसके बाद मैंने भी सोच लिया था कि दीदी अब मुझे खुद चोदने के लिए बोलेगी तो तभी में इसको चोदूंगा। फिर रात को दीदी ने खाना बनाया और हम खाना ख़ाकर सो गये। फिर रात को कुछ नहीं हुआ। फिर सुबह जब दीदी सो कर उठी और झाड़ू लगाने लगी तो मेरे रूम में आने से पहले मैंने मेरी पेंट उतार दी और अपने लंड को खड़ा करके सोने का नाटक करने लगा और अपने मुँह पर कंबल डाल लिया, जिसमें मैंने छेद कर रखा था।

अब में उस छेद से देख रहा था कि दीदी क्या करती है? फिर जब वो मेरे रूम में आई और लाईट ऑन की तो उसकी नजर सीधी मेरे लंड पर पड़ी। अब मेरा लंड उसको देखकर पूरा तन चुका था और उसको सलामी दे रहा था। फिर 1 मिनट तक देखने के बाद वो मेरे रूम से जाने लगी थी और फिर थोड़ी दूर जाने के बाद फिर से वापस आई और मेरी तरफ़ देखा और फिर वहीं पर खड़ी होकर मेरे लंड को देखने लगी थी, उसको लगा कि में सोया हूँ। फिर थोड़ी देर के बाद वो मेरे लंड को पास से देखने लगी और उसके पास आने से मेरा लंड और तन गया था और फिर कुछ देर तक देखने के बाद उसने फिर से झाड़ू लगाना स्टार्ट किया और झाड़ू लगाने के बाद फिर से देखने लगी थी। तब मैंने मेरा हाथ ले जाकर मेरे लंड का टॉप नीचे कर दिया और अपना लंड खड़ा करके उसको दिखाने लगा था। अब मेरा लंड पूरा लाल हो गया था, तो मेरा लाल लंड देखकर उसके मुँह से वाउ निकला था।

फिर मैंने अपने लंड को आगे पीछे करना स्टार्ट किया तो उसको शक हो गया कि में जाग रहा हूँ और फिर वो वहहाँ से चली गई। फिर उसके बाद में उठा और ब्रश करके जब चाय पी रहा था, तो तब मैंने दीदी से पूछा कि आपने झाड़ू लगा लिया क्या? तो तब दीदी बोली कि हाँ। तब मैंने पूछा कि मेरे रूम में लगाया क्या? तो तब दीदी बोली कि हाँ लगाया है, क्यों? तो तब में बोला कि नहीं बस ऐसे ही। तब दीदी बोली कि रात को बहुत गर्मी थी क्या? तो तब में बोला कि हाँ दीदी रात को बहुत गर्मी थी, दीदी आपको कैसा लग रहा था। तब दीदी बोली कि हाँ कल बहुत गर्मी थी। फिर में नाहकर तैयार हो गया और फिर बाद में दीदी भी नहाने चली गई। में दीदी को नहाते हुए देखने लगा, आज दीदी पूरी नंगी होकर नहा रही थी, लेकिन आज उसने अपनी चूत से पानी नहीं निकाला था, लेकिन नहाने के बाद जब वो बाहर निकली तो उसके हाथ में पेंटी ब्रा थी, मतलब आज उसने ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी और सिर्फ़ सलवार और पजामा पहना था।

हाँ दोस्तों मुझे मालूम था कि आज दीदी कौन सा सलवार सूट पहनने वाली है? तो मैंने उस पजामे की गांड का हिस्सा थोड़ा फाड़कर रखा था, लेकिन उसको पता नहीं था। अब बाद में खाना बनाते और खाते वक्त में उसके बूब्स ही देख रहा था, उसने आज चुन्नी भी नहीं डाली थी और उसके निप्पल भी साफ नजर आ रहे थे, आज वो मेरे ऊपर बहुत मेहरबान थी। फिर जब दोपहर हुई, तो तब मैंने दीदी से कहा कि चलो गाड़ी चलाते है। तो दीदी मान गई और फिर हम गाड़ी चलाने गये तो तब मैंने दीदी से कहा आज हम घर पर ही गार्ड्न में चलाते है।

मैंने आज शर्ट नहीं पहनी थी और सिर्फ़ बनियान और पेंट पहना था और अंडरवेयर भी नहीं पहना था। हमारा गार्डन थोड़ा बड़ा था, जिसमें हम आराम से गाड़ी चला सकते थे। फिर दीदी बगल की सीट पर बैठ गई और में ड्राइवर की सीट पर बैठ गया। फिर जब मैंने गार्डन में गाड़ी लाकर रखी और दीदी से कहा कि अब आप चलाओ। तो दीदी ने कहा कि गार्डन छोटा है और मुझसे ब्रेक नहीं लगे तो। तो तब में बोला कि तो फिर क्या करना है दीदी? तो वो शर्माकर बोली कि कल जैसे बैठते है, तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर जब दीदी दरवाजा खोलकर मेरे पास आने लगी तो मैंने मेरी पेंट की चैन खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और मेरी पेंट को थोड़ा नीचे सरका दिया और बनियान को भी ऊपर कर दिया था। फिर जब उसने दरवाजा खोला तो मेरा पूरा तना हुआ लंड उसके सामने थाम, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर उसने 1 मिनट तक मेरे तने हुए लंड को देखा और मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और गाड़ी स्टार्ट करने लगी। फिर मैंने थोड़ी उसकी गांड को हिलाया और उसके फटे हुए पजामे में से मेरा लंड अंदर कर दिया और उसके दोनों पैरो को मेरे पैरो में ले लिया।

फिर उसने गाड़ी स्टार्ट की और चलाने लगी थी। अब में मेरी सेटिंग जमा रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद मेरा लंड उसकी गांड के छेद में टच हुआ। फिर मैंने सेकेंड राउंड में ज़ोर से एक्सीलेटर दबा दिया, तो गाड़ी तेज हुई और ज़ोर से ब्रेक मारा। अब मैंने उसकी कमर पकड़ के रखी थी तो ब्रेक मारते ही मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया था, मैंने ब्रेक बहुत जोर से मारा था। अब उसका पूरा ध्यान गाड़ी में था और मेरा लंड उसकी गांड में था। फिर थोड़ी देर बाद मैंने फिर से वैसा ही किया और अब मेरा पूरा लंड उसकी गांड में था, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर थोड़ी देर के बाद वो गर्म होने लगी और फिर मैंने उसकी गांड को ऊपर नीचे करना स्टार्ट किया। फिर जैसे ही वो गर्म हुई तो मैंने मेरा लंड बाहर निकाल लिया और कहा कि बाकी का काम घर में करते है।

फिर जब हम घर आए तो में पूर नंगा हो गया और उसको भी नंगा किया और फिर उसके बूब्स दबाने लगा और बहुत देर तक उसके बूब्स को ही दबाता रहा और निप्पल को काटता रहा और फिर उसकी चूत को चाटना स्टार्ट किया। अब वो बहुत गर्म हो गई थी और बोली कि अब बस करो और मेरी चूत में डालो। तब में बोला कि क्या डालूं? तो तब वो बोली कि अपना लंड डालो। अब में समझ गया था कि अब वो पूरी गर्म है। फिर तब में बोला कि मेरी कुछ शर्तें है माननी होंगी तो डालता हूँ। तो तब वो बोली कि कैसी शर्त? मुझे सब मंजूर है। तो तब में बोला कि मेरी पहली शर्त है तुम आज के बाद कभी भी चुदवाने के लिए ना नहीं कहोगी? बोलो मंजूर है। तो तब वो बोली कि हाँ मंजूर। फिर तब में बोला कि ओके, मेरी दूसरी शर्त है में तुझे कहीं पर भी चोदूंगा, तुम ना नहीं कहोगी? बोलो मंजूर है। तो तब वो बोली कि हाँ मंजूर है। फिर तब में बोला कि मेरी तीसरी शर्त है तुम्हारी देवरानी को मुझसे चुदवाओगी? बोलो मंजूर है। तब वो बोली कि देवरानी को में कैसे तैयार करुँगी?

loading...

तब में बोला कि वो मुझे नहीं मालूम और फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी। तो तब वो बोली कि ओके बाबा ठीक है। तब में बोला कि मेरी चौथी शर्त तुम्हारे पेट में जो बच्चा है अगर लड़की हुई तो उसकी सील में तोडूंगा और अगर लड़का हुआ, तो तुम्हारी चूत उसके लिए पहली चूत रहेगी, बोलो मंजूर है। तब वो बोली कि अच्छा बाबा ठीक है, अब तो डालो। तब में बोला कि ओके अब में तुझे चोदूंगा और फिर मैंने उसकी चूत को इतना चाटा कि आखिरकार वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाला तो वो तड़पने लगी, शायद मेरा लंड ज्यादा मोटा था और फिर मैंने उसको दो बार चोदा और एक बार उसकी गांड भी मारी और फिर हम दोनों सो गये और जब उठे तो रात के 9 बज चुके थे। अब वो बेड से उठ नहीं पा रही थी, क्योंकि उसकी चूत में बहुत दर्द हो रहा था।

फिर रात को हम दोनों ने एक साथ खाना खाया और उसको एक बार और चोदने को कहा तो वो नहीं मानी। फिर तब में बोला कि तुमने वादा किया है तो तब वो बोली कि आज नहीं प्लीज। तब में बोला कि ओके मुँह में ले लो। अब वो नहीं मान रही थी तो मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में अपना लंड डाला और उसके मुँह को चोदने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद वो मेरा सारा वीर्य पी गई और फिर हम दोनों सो गये। फिर सुबह जब वो रोटी बना रही थी तो में नीचे अपना मुँह डालकर उसकी चूत को चाटने लगा। तो उसने बहुत मना किया, लेकिन मैंने आख़िरकार उसका पानी पी लिया और हाँ सभी बहनों को अपने-अपने भाइयों से एक बार सेक्स जरुर करना चाहिए, क्योंकि बहनें तो शादी के बाद पराए मर्द को चूत का असली मज़ा तो देते ही है, लेकिन जो मर्द बचपन से जिस चूत और बदन की हिफ़ाजत करता है, उसे क्या मिलता है? में तो कहता हूँ कि चूत की सील बाप या भाई से ही खुलानी चाहिए। खैर आगे अपनी-अपनी सोच है ।।

धन्यवाद …

इस कहानी को Whatsapp और Facebook पर शेयर करें ...

Comments are closed.