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दीदी की पेंटी का दीवाना

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प्रेषक : शेखर …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम शेखर है और में ग्वालियर का रहने वाला हूँ। में एक 20 साल का इंजिनियरिंग का स्टूडेंट हूँ और मेरे घर में पापा, मम्मी और मेरी एक बड़ी बहन है। अब में आपको बता दूँ कि मुझे लड़कियों में सबसे ज़्यादा अच्छी उनकी पेंटी लगती है, शायद ये चूत का नशा हो या मेरे जैसे और कितने लड़के होंगे? जिन्हें ये सब अच्छा लगता होगा। में हमेशा से लड़कियों की पेंटी चुराने में लगा रहता था, मैंने अपनी अलमारी में अपनी बहन की दो पेंटी, मम्मी की एक पहले से ही चुराकर रखी हुई थी।

अब जब भी घर में कोई नहीं रहता था, तो में इन पेंटी को निकालकर सूंघता, चूमता और पहन भी लेता था, कभी-कभी तो में अपना लंड पेंटी पर रगड़ता और मूठ मारता था। इससे मुझे बहुत मजा आता था क्योंकि मुझे पेंटी कहीं और से मिल नहीं पाती थी, इसलिए में अपने घरवालों की ही चोरी करता था, जैसे मामी, चाची वगेरह।

फिर एक बार हम सब लोग गाँव गये और आप तो जानते ही है गाँव में नदी या कुआं होता है। तो मैंने देखा कि मेरी मौसी की बेटी (पूजा) और मेरी बहन दोनों नदी पर नहाने जा रही थी, तो मैंने सोचा कि पूजा की पेंटी चोरी करने का इससे अच्छा मौका कभी नहीं मिलेगा। फिर वो दोनों अपने कपड़ो को साईड में रख देती है और नहाने चली जाति है। फिर में पानी पीने के बहाने से वहाँ गया और चुपके से एक काली रंग की पेंटी अपनी पॉकेट में रखकर खेत में चला गया और वहाँ नंगा होकर उस पेंटी को अपने लंड से रगड़ने लगा और फिर हम अपने घर वापस आ गये। दोस्तों अब इतनी सेक्स कि इच्छा बढ़ने के कारण मुझे अपनी बहन की जवानी लूटने का मन करने लगा था। मेरी बड़ी बहन सोनल मुझसे 2 साल बड़ी है, वो दिखने में बिल्कुल मस्त, चूची बड़ी है और मस्त फिगर वाली है और वो घर में अक्सर स्कर्ट पहनकर रहती थी, जिससे में कभी-कभी उसकी जांघों को देखता रहता था और उससे जरा सी भी भनक नहीं होने देता था और मेरे पास उसकी एक पेंटी तो बहुत पहले से ही थी। अब में मज़े लेने में कभी दूर नहीं रहता था। फिर एक बार हमारे घर पर कुछ मेहमान आए इसलिए रात में में और मेरी बहन एक साथ एक ही बेड पर सो गये। अब वो स्कर्ट पहनकर सोई थी और कभी-अभी अपनी जांघों को फैला रही थी।

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फिर में चुपचाप लेटकर उल्टी दिशा में सो गया, मतलब मेरी बहन के पैरो के पास अपना मुँह करके सो गया था और उसकी स्कर्ट के नीचे से झांकने लगा था। अब मुझे अंधेरे में ज़्यादा कुछ नहीं दिखा था। फिर दूसरे दिन सुबह होते ही वो मेरे लिए चाय बनाकर लाई, तो वो चाय देते हुए थोड़ी झुकी तो उसके टॉप से उसकी बूब्स की झलक मुझे मिल गयी, लेकिन उसे ये सब मालूम नहीं चला था। फिर इस तरह से मेरा सेक्स उसके ऊपर और बढ़ाता गया। फिर एक बार घर में कोई नहीं था और जब शाम का वक़्त था और पापा आउट ऑफ स्टेशन और मम्मी किसी रिश्तेदार के यहाँ गयी हुई थी, तो मैंने अपनी अलमारी से अपनी बहन की 4 नमकीन पेंटी और 2 मम्मी की पेंटी निकालकर बेड पर रख दी और फिर मैंने बेड पर चारों तरफ पेंटी को फैला दिया और नंगा होकर उन पर सो गया और उन पेंटियों को चाटने लगा और रूम में बहन की फोटो को देखकर अपना लंड हिलाने लगा। फिर तभी मेरी बहन पीछे के दरवाज़े से अचानक अंदर घुस गयी और मेरे रूम में आ गयी, तो में घबराकर अपनी पेंट पहनने लगा। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब उसने बेड पर पड़ा हुआ सब सामान देख लिया था और अपनी पेंटी को भी देखती रही और फिर वो गुस्से में वहाँ से चली गयी। फिर रात में खाना बनाकर वो मुझे खाना खाने के लिए बुलाने आई। अब हम दोनों 2 दिन तक बिल्कुल अकेले थे, तो उसने कहा कि तुम ऐसा क्यों करते हो? तुमने मेरी पेंटी क्यों चुराई? तो मैंने कहा कि दीदी आप जवानी की एक मूरत हो और कोई भी लड़का आपके साथ सेक्स करना चाहेगा। फिर दीदी ने कहा कि तुम मेरी पेंटी के साथ क्या करते हो? तो मैंने कहा कि दीदी सच कहूँ तो मुझे पेंटी सूंघना, चाटना और चूमना अच्छा लगता है, क्योंकि जिस भी लड़की की में पेंटी चूमता हूँ तो मुझे उसकी वेजाइना (चूत) की याद दिलाती है और में अपने सेक्स इच्छा को संतुष्टि देता हूँ। तो दीदी ने कहा कि तभी पूजा और मम्मी की भी पेंटी तुम्हारे पास होगी, तो मैंने हाँ कह दिया। फिर दीदी ने कहा कि में तुम्हारी बहन हूँ और ये सब ख्याल अपनी दीदी के लिए रखना पाप है। फिर मैंने कहा कि नहीं आप बहन और लड़की दोनों है, आपकी भी कुछ इच्छा होगी।

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फिर उस रात दीदी स्कर्ट टॉप पहनकर सोने चली गयी और में भी उसी बेड पर सो गया। फिर रात को धीरे-धीरे में अपना एक हाथ दीदी की स्कर्ट के अंदर ले गया और उनकी जांघो को छूने लगा, तो दीदी ने कहा कि ये सब मत करो, में सब मम्मी को कह दूँगी? तो में दीदी को अपनी कसम देकर कहने लगा कि अगर आप मम्मी से कहेंगी, तो में आत्महत्या कर लूँगा। फिर दीदी घबरा गयी और इन सबके लिए तैयार हो गयी। फिर मैंने दीदी की स्कर्ट को खोल दिया और उनका टॉप भी हटा दिया। अब दीदी पिंक कलर की सिल्क पेंटी पहने थी और वाईट ब्रा पहनी थी। फिर मैंने उनके 34 साईज के बूब्स को पकड़ा और अपने एक हाथ से अपना 8 इंच लम्बा लंड बाहर निकाल लिया और उनकी पेंटी के ऊपर से ही दीदी की चूत को चाटने लगा, तो दीदी चुपचाप यह सब देखती रही।

अब में और दीदी पहली बार यह सब कर रहे थे इसलिए मेरे लंड से तुरंत ही वीर्य निकल गया, लेकिन फिर मैंने दीदी की पेंटी हटाकर दीदी के शरीर के सबसे महंगी चीज को देखा, तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। फिर जब मैंने दीदी की चूचीयों पर अपना हाथ रखा तो मुझे ऐसा लगा कि में दुनियाँ की सबसे मुलायम चीज को छू रहा हूँ। फिर में वक़्त की नज़ाकत को देखते हुए अपना लंड दीदी कि चूत में डालने लगा और धक्का मारने लगा। तो दीदी आआआआहह, ऊऊओउउऊ, हाईईईईई की आवाजे निकालने लगी और मुझे भी डराने लगी। फिर 10-15 और धक्के मारने के बाद दीदी भी मजे लेने लगी और मेरा साथ देने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये और अपने कपड़े पहन लिए। फिर मैंने दीदी से कहा कि ये पेंटी चुराने वाली बात किसी से नहीं कहना, में ये आपकी पेंटी अपने मरने तक अपने साथ रखूँगा और मज़े लूँगा ।।

धन्यवाद …

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