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देवर का पूरा फर्ज निभाया

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प्रेषक : विनोद …

हैल्लो दोस्तों, ये बात उन दिनों की है, जब में 18 साल का था और मेरी फेमिली अहमदाबाद में रहती थी। अगर आपको शहर के मौहल्ले और गलियाँ पता हो तो बिल्कुल एक दूसरे से जुड़े हुए होते है। वहाँ बस एक या दो मंज़िल होती है और हर कोई एक-दूसरे के घर में ताक झांक भी कर सकता है और वहाँ घर भी पुराने होते है यानि पुरानी दरार वाली खिड़कियाँ और दरवाजे जो पूरे बंद भी नहीं हो सकते है। अब ऐसे मौहोल में बच्चे भी ज़्यादा समझदार हो जाते है, तो में भी हो चुका था। घर भी छोटे-छोटे एक या दो रूम वाले होते है, यानि रात को मम्मी-पापा, या भाई-भाभी कुछ करे तो जरूर देख सकते है और रोज़ सेक्स-एजुकेशन मिल जाता है। तो ऐसी स्थिति में हम दोस्तों को भी ज़्यादा कुछ देखने का चस्का लगा रहता है और रात को कई बार हम पड़ोसी के घरो में झांककर उनकी चुदाई भी देखा करते थे। हाँ एक बात जरुर है कि वहाँ यूनिटी बहुत होती है और हर कोई एक-दूसरे के काम आता है।

फिर जब हम अहमदाबाद में शिफ्ट हुए थे, तो यह तब की बात है। मेरा एक दोस्त मेरे साथ ही पढ़ता था और वो अपने भाई, भाभी और उनके 3 बच्चों के साथ रहता था। उनके घर में सिर्फ़ एक कमरा और एक छोटा सा बाथरूम था। फिर एक दिन अचानक से मेरे दोस्त और उसके भाई को आउट ऑफ शहर जाना पड़ा तो उन्होंने मुझसे बोला कि भाभी अकेली है और हमें उसकी बहुत टेन्शन है, तो तू रात में मेरे घर आकर सो जाना, तो में उसके घर सोने चला गया। अब तक मैंने भाभी (उनका नाम भानू था) से कोई सेक्स की नज़र से बात भी नहीं की थी या ऐसा सोचा भी नहीं था। फिर जब में उनके घर गया तो जब बहुत रात हो गई थी और जैसा कि मैंने बताया कि उनके घर में एक ही रूम था, तो भाभी ने ज़मीन पर सबका बेड लगा दिया। अब एक दीवार के करीब में उनके दो बच्चे और फिर वो ऐसे सोने की तैयारी कर ली थी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर रात को भाभी बोली कि विनोद नाईट लेम्प बंद करना पड़ेगा, नहीं तो छोटा नहीं सोएगा। फिर मैंने कहा कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है, तो हम बिल्कुल अंधेरा करके सो गये और मेरी आँख लग गई। फिर अचानक से नींद में मुझे ऐसा अहसास हुआ कि कोई मुझे छू रहा है, तो में धीरे से जगा, लेकिन अंधेरा था तो मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन मेरे पजामे पर मेरे लंड के पास कोई टच कर रहा था। अब मुझे तो अच्छा भी लगा तो में खामोश रहा, लेकिन वो हाथ अपना काम करता रहा और फिर उस हाथ ने मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे से मेरा पजामा खोलकर मेरा लंड बाहर आ गया। मैंने वो हाथ पकड़ लिया तो वो भाभी का हाथ था और में कुछ बोल नहीं पाया।

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लेकिन फिर भाभी ने अपने दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिया, लेकिन फिर भी में खामोश रहा और अपने हाथ को हिलाया भी नहीं। फिर भाभी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर मेरे हाथ से अपने बूब्स को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया तो में जैसे नींद से जगा हूँ वैसे बैठ गया। फिर भाभी बोली कि क्या हुआ? तो मैंने कुछ नहीं कहा। फिर भाभी ने मुझे फिर से सुला दिया और मुझसे चिपककर सो गई और बिना बोले अपना ब्लाउज खोलकर मेरे मुँह को अपने बूब्स के पास रख दिया और धीरे से फुसफुसा कर बोली कि दूध पी लो। अब मुझे तो मन कर रहा था तो मैंने उनके बूब्स को पीना शुरू दिया और भाभी ने फिर से मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। फिर में धीरे से बोल पड़ा कि भाभी चोद दूँ क्या? भाभी क्या हम चुदाई करने वाले है? तो भाभी ने सिर्फ़ हाँ कहकर मुझे और जकड़ लिया। तो मैंने कहा कि मैंने कभी चुदाई नहीं की है तो वो थोड़ी हंस पड़ी और बोली कि सीख जाओगे।

फिर भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर करके मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया और उनकी चूत की जगह पर बहुत बाल थे और में सिर्फ़ वहाँ अपने हाथ से सहला रहा था। तो अब भाभी बैठ गई और अपना सिर झुकाकर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। अब में तो बहुत गर्म हो गया था और उतने में ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मेरा सारा पानी भाभी के मुँह में चला गया और मेरा लंड सिकुड़ने लगा, लेकिन भाभी ने उसे नहीं छोड़ा और फिर से मेरा लंड चूसने लगी। फिर थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से तन गया तो भाभी बोली कि ऊपर आ जा, तो में उनके ऊपर सवार हो गया, लेकिन मुझे तो उनकी चूत का रास्ता ही नहीं मिल रहा था। अब में तो सिर्फ़ अपने लंड को उनकी चूत पर दबाकर रगड़ ही रहा था।

फिर भाभी हंस पड़ी और मुझसे बोली कि थोड़ा ऊपर हो जा और तो उन्होंने हम दोनों के बीच में अपना हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर रख दिया और बोली कि धीरे से धक्का लगाओ। तो मैंने जैसे ही धक्का लगाया तो जोश में मेरा पूरा लंड अंदर हो गया, तो भाभी की सिसकारी निकल गई। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में स्वर्ग में पहुँच गया हूँ और अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे लंड के आसपास मखमल की मखमली गीली दीवारे है जिन्होंने मेरे लंड को जकड़ लिया था। फिर मैंने तो अंजाने में ही धक्के लगाने चालू कर दिए तो भाभी बोलती ही रही धीरे-धीरे करो, लेकिन मेरे जोश के आगे उनकी कुछ नहीं चली और में सिर्फ़ 3 मिनट में फिर से झड़ गया, लेकिन इस बार जब में झड़ गया तो मेरे लंड से ढेर सारा पानी निकला और भाभी की चूत भर गई और अब में तो उन पर ही पड़ा रहा, लेकिन फिर भाभी ने मुझे अपने हाथों से मेरी पीठ को सहलाते हुए बताया कि तुम नये खिलाड़ी हो और जोश में ऐसा कर बैठे, लेकिन अबकी बार जब करो तो सब्र से करना, नहीं तो लड़की को कोई संतुष्टी नहीं मिलेगी और लड़की अधूरी रह जाएगी ।।

धन्यवाद …

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