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दिल्ली की सेक्सी सरदारनी

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प्रेषक : करण …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम करण है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मेरे सारे दोस्त दिल्ली के ही है तो में अक्सर अपने दोस्तों से मिलने उनके एरिया में जाता रहता हूँ। यह कहानी अभी 2 महीने पहले की है, जब में अपने एक दोस्त के यहाँ उससे मिलने गया, तो वो घर पर नहीं था, तो में बाहर ही अपनी कार में बैठा म्यूज़िक सुन रहा था और उसका इंतजार कर रहा था कि तभी मेरी नज़र सामने वाली बालकनी में गई, जहाँ एक बेहद हसीन सरदारनी आंटी खड़ी थी और लगातार मुझे देखे जा रही थी। फिर में भी इधर-उधर देखकर उसकी तरफ देखे जा रहा था, लेकिन वो कुछ ज़्यादा ही प्यार से देखकर हल्का-हल्का मुस्कराने लगी थी।

अब मेरा लंड अपनी नींद से जागने लगा था और फिर मैंने वो किया जो मैंने कभी नहीं किया था। अब मैंने उसे इशारा कर दिया था, अब मैंने अपने हाथ की उंगलियाँ इस तरह घुमाई जैसे में उसकी तरफ ही कर रहा हूँ। फिर उसने भी वैसे ही अपनी उंगलियों से ही इशारा कर दिया, अरे यार मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा था। फिर मैंने उसे इशारे से उसको मोबाइल दिखाया और उसे उसका नंबर पूछ लिया तो वो अंदर चली गई और जब वापस आई तो उसके हाथ में कोई स्लिप थी, जो उसने मुझे दिखाई और स्टाइल मारती हुई नीचे फेंक दी। फिर में अपनी कार से उतरा और ऐसे ही इधर-उधर देखते हुए गया और स्लिप उठा ली, उसमें उसका मोबाईल नंबर लिखा हुआ था।

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फिर में अपनी कार में बैठा और अपने दोस्त की गली से बाहर आ गया और उसे फोन किया। फिर हम दोनों ने एक दूसरे के बारे में सब बताया और फिर हमारी दोस्ती हो गई और फिर हम फोन पर ही किस और सेक्सी बातें करने लगे। उसने मुझे कसम दी थी कि में अपने दोस्त को इस बारे में कुछ ना बताऊं और आप लोग यकीन करो मैंने आज तक अपने दोस्त को कुछ नहीं बताया है। (यार आप लड़कियो की इज्जत करोंगे तभी तो लड़कियाँ आपको अपनी इज़्ज़त देंगी) फिर एक दिन उसका सरदार कहीं गया हुआ था तो मुझे मीनू का फोन आया कि अमित क्या तुम बिना किसी को पता चले अभी मेरे घर आ सकते हो? तो मैंने कहा कि ये कैसे हो सकता है? मेरे फ्रेंड का घर आपके घर के पास में ही है और वहाँ सब मुझे जानते है अगर कोई देख लेगा तो सब समझ जाएगा। फिर मैंने उसको आइडिया दिया कि आप अपनी कोठी का दरवाजा खोलो और जहाँ आपकी कार खड़ी होती है में वहाँ पर अपनी कार खड़ी कर दूँगा और फिर आप दरवाजा बंद कर देना, इससे किसी को पता नहीं चलेगा कि अंदर किसकी कार है? फिर मैंने अपने एक दोस्त के घर पर अपनी कार खड़ी की और उसकी कार लेकर जिसके एकदम काले कांच थे, उस गली में चला गया और उसको फोन कर बता दिया कि में नीचे आ गया हूँ। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उसने दरवाजा खोला और मैंने कार अंदर खड़ी कर दी और चुपचाप अंदर चला गया और जाते ही सबसे पहला काम यही किया कि मीनू को अपने गले लगाया और ज़ोर से एक पप्पी भी ले ली। अब वो भी फुल मूड में थी, अब मीनू की भी फट रही थी कि कहीं कोई आ ना जाए इसलिए हमने पहली चुदाई तो ऐसे करी जैसे घोड़ो की रेस कर रहे हो और फिर हम फटाफट नंगे हो गये। अब मीनू मुझे किस ऐसे कर रही थी जैसे पागल ही हो गई है, वो एकदम गर्म हो गई थी। अब मैंने उसके बूब्स दबा-दबाकर अपने हाथों की सेहत बना ली थी। अब वो मेरा लंड कभी अपने हाथों से पकड़ती तो कभी अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर देती थी। फिर मैंने उसके बूब्स पर लव बाईट दिए, तो उसने भी मेरी गांड पर लव बाईट दिए और हमने मुश्किल से 15 मिनट में ही चुदाई पूरी कर ली और में फटाफट अपनी कार लेकर वहाँ से चला गया ।।

धन्यवाद …

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