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कंप्यूटर के बहाने कुंवारी चूत चोदी

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प्रेषक : दीपक …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम दीपक है, में 22 साल का हूँ, में झाँसी मे रहता हूँ। में जिस बिल्डिंग में रहता हूँ, उसके सामने वाली बिल्डिंग में एक बहुत खुबसूरत औरत रहती है, उनका नाम स्वाती है, उनकी उम्र 35-40 साल होगी, वो लोग केरल से आए थे। उनके पति सरकारी जॉब करते थे, 1 साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी, तो पति की सर्विस स्वाती जी को मिल गई थी। उनके एक लड़की है, उसका नाम तृष्णा है, वो 12वीं क्लास में पढ़ रही है। फिर एक दिन तृष्णा स्कूल की कुछ प्रॉजेक्ट की तैयारी मेरे कंप्यूटर में कर रही थी, उसको कंप्यूटर ऑपरेट करना नहीं आता था। तो तब वो मुझसे बोली कि आप मुझे हेल्प कर देंगे। तो तब मैंने भी हाँ कर दिया। अब में कंप्यूटर के साईड में बैठकर ऑपरेट करने में उसकी मदद कर रहा था। फिर में बीच-बीच में जब की-बोर्ड पर हाथ लगाता तो उसके 34 साईज़ बूब्स मेरे हाथ से टच हो रहे थे। पहले तो मैंने उतना ध्यान नहीं दिया, लेकिन एक दो बार जब वैसा हुआ, तो तब मुझे भी मज़ा आ रहा था, क्योंकि उसकी टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं थी।

अब में भी बार-बार उसके बूब्स को टच कर रहा था। अब मेरी कोहनी तृष्णा की बाँहों के नीचे से उसके बूब्स को बार-बार टच कर रही थी। फिर कुछ देर तक ऐसे ही होता रहा। अब मेरी कोहनी कभी-कभी थोड़ी ज़ोर से उसके बूब्स को बाजू से टच कर रही थी, लेकिन उसने कोई रिएक्शन नहीं किया था। फिर कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि उसकी बाहें और बूब्स के बीच में कुछ और जगह बन गई है, जिस कारण मेरी कोहनी अब आसानी से उसके पूरे बूब्स पर रखी जा सकती थी। अब उसके शरीर की गर्माहट में महसूस कर रहा था। फिर उसने खुद जानबूझकर ही अपना हाथ थोड़ा सा आगे खिसका दिया था, ताकि मेरी कोहनी के लिए जगह बन जाए।

फिर मैंने हिम्मत करके इस बार अपनी कोहनी को कुछ ज्यादा अंदर तक जाने दिया। अब लगभग आधा बूब्स मेरी कोहनी के नीचे था, लेकिन मैंने अपनी कोहनी का पूरा भार नहीं रखा था। फिर मैंने हल्के- हल्के से अपनी कोहनी उसके बूब्स पर घुमाई। तो तब उसने कुछ नहीं बोला और अपने आँखें बंद किए बैठी रही थी। अब इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी। फिर मैंने धीरे से अपनी कोहनी टेढ़ी की और अंदर डाली। अब उसका पूरा बूब्स मेरी कोहनी के नीचे था। फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी कोहनी से उसके बूब्स पर दबाव देना शुरू किया। अब वो चुपचाप बैठी थी। अब में समझ गया था कि उसको भी ये खेल अच्छा लगने लगा है। तभी वो अचानक से उठ गई और बाहर जाकर उसकी मम्मी से बोली कि आप लोग बहुत ज़ोर से बातें कर रही हो, मुझे डिस्टर्ब हो रहा है। तब उसकी मम्मी बोली कि ऐसा है तो दरवाजा बंद कर ले।

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फिर तब उसने कंप्यूटर रूम में आकर दरवाजा बंद कर दिया और फिर मुस्कुराते हुए मेरे पास में बैठ गई थी। फिर मैंने उसके गले के पास किस किया, तब उसने अपनी आँखें बंद कर ली। फिर में जंगलियों की तरह उसको चूमने लगा, उसके पूरे मुँह पर किस किया, उसके होंठो पर भी किस किया। अब वो भी मस्ती में आ गई थी। फिर में उसको किस करता रहा और उसके बूब्स दबाने लगा था। अब इससे वो और भी मस्ती में आ गई थी। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी और उसके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा था और उनको चूसने लगा था। फिर मैंने उसकी पेंट और चड्डी भी उतार दी और उसकी चूत को रगड़ने लगा और साथ ही साथ उसके बूब्स भी चूस रहा था। फिर में अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत को चाटने लगा था। अब उसके जिस्म में आग लग गई थी और अब वो ज़ोर-ज़ोर से आवाजें निकाल रही थी। फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए।

फिर मैंने उससे कहा कि इसको चूसो। तब उसने ऐसा ही किया और उसको बहुत मज़ा आया था। तो तब एकदम से मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरी जान निकल रही हो, मगर मुझे बहुत मज़ा आया था और अब वो मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी थी। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब मेरे मुँह से आवाज निकल रही थी आआहह, आआआ, ज़ोर से चूसो, मुझे खा जाओ, आहह ज़ोर से और ज़ोर से, आअहह, प्लीज, आअहह, मज़ा आ रहा है, ममममम्म बेटा, में झड़ने लगा हूँ, मेरा पानी (वीर्य) पी लो और फिर थोड़ी देर में ही में झड़ गया। अब मेरे वीर्य से उसका पूरा मुँह भर गया था। तब में उससे बोला कि इसको पी लो, तो वो मेरा वीर्य पी गई। अब उसे बहुत मज़ा आया था। फिर में उससे बोला कि अब सोफे पर लेट जाओं और फिर में नीचे बैठकर उसकी चूत को चाटने लगा, उस कंप्यूटर रूम को में अकेला यूज़ करता हूँ और इसमें मेरा शरीर पर लगाने वाला तेल रखा था। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने थोड़ा तेल निकालकर अपने लंड पर मसला और थोड़ा उसकी चूत पर भी मसला और फिर उससे बोला कि थोड़ा दर्द होगा, लेकिन मज़ा ज्यादा आएगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में आहिस्ता- आहिस्ता डालना शुरू किया। तब उसे थोड़ा दर्द हुआ और फिर उसने मुझे बताया। तब मैंने और आहिस्ता से अपना लंड डाला, तो तब उसको बहुत मज़ा आया था। फिर जब मेरा लंड पूरा अंदर चला गया तो तब मैंने हिलना शुरू कर दिया। अब उसने भी हिलना शुरू कर दिया और बोलने लगी थी कि ज़ोर से करो और ज़ोर से, आह्ह्ह अंकल मज़ा आ रहा है और फिर थोड़ी देर में ही झड़ गई थी। फिर उसके बाद मैंने अपना लंड बाहर निकालकर अपने हाथ से हिलाना शुरू कर दिया और उसके मुँह और बूब्स पर अपना वीर्य झाड़ दिया था और फिर उससे बोला कि बेटा अपने अंकल का माल आआआअ अपने मुँह और बूब्स पर मल ले। तब उसने ऐसा ही किया और फिर मैंने उसे उठाया और उससे पूछा कि मज़ा आया? तो तब वो बोली कि बहुत मज़ा आया अंकल, इससे पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया था। तो तब मैंने उससे कहा कि तो किसी को बताना नहीं।

अब उसके बाद से में उसको बीच-बीच में कंप्यूटर सिखाने के बहाने से अपने घर में बुलाकर चोदता हूँ और अब हम दोनों खूब मजा करते है ।।

धन्यवाद …

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