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चुदक्कड़ माँ और उसकी बेटियाँ

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प्रेषक : आकाश …

हैल्लो दोस्तों, आशा जब 20 साल की थी, तो तब उसकी शादी अजीत से 10 साल पहले हुई थी। अब शुरू-शुरू में उसकी सुहागन की जिंदगी और उसकी चूत की चुदाई ठीक ठाक चल रही थी। अजीत उसकी चूत को हर रोज सुबह और रात को खूब जमकर चोदता था और अब इससे आशा की चूत भी संतुष्ट थी, लेकिन कुछ सालों में अजीत कमजोर पड़ने लगा और ठीक से आशा की चूत को चोद नहीं पाता था। अब घंटो तक उसका लंड चूसने पर उसका लंड खड़ा होता था और फिर लंड खड़ा होते ही वो जल्दी-जल्दी आशा की चूत में अपना लंड डालकर चोदने लगता था, ताकि उसका लंड फिर से मुरझा ना जाए। अब इससे आशा की चूत भूखी रह जाती थी और हमेशा लंड की ठोकर मांगती थी।

अब आशा अजीत के सामने अपनी चूत में अपनी एक उंगली डालकर अपनी चूत को शांत करने का नाटक करती थी। अब आशा अपनी जवानी को ऐसे ही बर्बाद नहीं करना चाहती थी और अब वो अपनी चूत को एक मोटे और लम्बे लंड से चुदवाने के लिए तरसती रहती थी। अब कुछ दिनों तक तो आशा चुपचाप थी, लेकिन उसकी चूत ने उसे शांत नहीं रहने दिया और फिर एक दिन वो नरेन्द्र से मिली। अब शुरू-शुरू में तो आशा नहीं चाहती थी कि वो नरेन्द्र के सामने अपनी साड़ी उठाए और उससे अपनी चूत चुदवाए, लेकिन आशा अब बिना चूत में लंड लिए जी नहीं सकती थी और इसलिए आशा ने नरेन्द्र से अपनी चूत चुदवाना शुरू कर दिया और ये बात अजीत से छुपाए रखी थी।

अब आशा को नरेन्द्र से चुदवाना धीरे-धीरे पसंद आने लगा था और अब उसके मन में इससे कोई शर्मिंदगी नहीं थी, क्योंकि उसके माँ और बाप भी यही करते थे। आशा के माँ बाप अपने एक छोटे भाई (बाप का भाई) के साथ रहते थे। अपनी छोटी उम्र से ही आशा और उसकी बहन यह जानती थी कि उनकी माँ अपने देवर और अपने पति से अपनी चूत मरवाती है। वो दोनो बहनें रोज दोपहर को जब उनके पिताजी खेत पर काम कर रहे होते, तो तब वो  अपने चाचा को माँ के बेडरूम में जाते हुए देखती थी। फिर जब वो दोनों बहनें कुछ बड़ी हुई और समझदार हुई तो तब उन्होंने दरवाजे के छेद से अंदर झाँकने का सोच लिया। फिर जब उन दोनों बहनों ने अंदर देखा तो उनको पहली बार यह मालूम हुआ कि अंदर क्या चल रहा है? अब अंदर उनकी माँ और चाचा दोनों नंगे थे और चाचा उनके ऊपर उल्टे लेटकर अपनी कमर ऊपर नीचे कर रहे थे। फिर बाद में उनको मालूम चला कि उन्होंने जो कुछ भी देखा था, वो माँ और चाचा की चुदाई थी।

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फिर कभी वो देखती थी कि उनकी माँ चाचा का लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही है, तो यह देखकर उन दोनों बहनों को बहुत मज़ा आता था। तो कभी-कभी उन्होंने देखा कि चाचा उनकी माँ की चूत को चोदने से पहले अपनी जीभ से चाट रहा है और अपने होंठो में भरकर चूस रहा है। अब रात को वो दोनों बहनें अपनी माँ की चूत की चुदाई अपने बाप के लंड से होते हुए देखा करती थी। कभी-कभी उनकी माँ अपने पति से चुदवाने के बाद अपनी चूत को धोकर उनके चाचा के कमरे में चली जाया करती थी और फिर वो दोनों फिर से चुदाई करने लगते थे और फिर चुदाई के बाद उनकी माँ फिर से अपनी चूत धोकर उनके पिताजी के पास जाकर सो जाया करती थी। अब वो दोनों बहनें अपनी माँ पिताजी और चाचा की चुदाई देख-देखकर काफ़ी कुछ जान गई थी और अब कुछ दिनों के बाद वो एक दूसरे से खेलने लगी थी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब वो अपने कम्बल के नीचे एक दूसरे की चूची और चूत से खेला करती थी, वो एक दूसरे की चूत को चाटती और चूसा भी करती थी और अब इससे उनको बहुत मज़ा मिलता था, लेकिन एक दिन उनकी माँ ने उनको यह सब करते देख लिया और उनको सेक्स के बारे में सब कुछ समझा दिया था। तब उनकी माँ ने बताया कि जब वो छोटी थी तो वो बहुत चुदक्कड थी, अपनी शादी के बाद से ही उनके ससुर जी ने बता दिया था कि उनका आदमी चुदाई में कमजोर है और इसलिए वो अपने देवर से अपनी चूत चुदवा सकती है, इसमें कोई पाप नहीं है, क्योंकि उनके पति का लंड कमजोर है और उनकी चूत की गर्मी को पूरी तरह से शांत नहीं कर सकता है, मुझे इस बात पर खुशी है कि तुम दोनों भी हमारे रास्ते पर चल रही हो, मुझको तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा तगड़ा सा पति ढूढ़ना पड़ेगा, लेकिन फिलहाल तुम दोनों को अपने आपको शांत करना पड़ेगा। अब से में तुम दोनों को मेरी चूत की चुदाई देखने के लिए अपना दरवाजा थोड़ा सा खुला रखूँगी, तुम दोनों खुलकर मेरी चूत की चुदाई देख सकती हो और हर काम ठीक से समझ सकती हो।

अब उस दिन के बाद से वो दोनों बहनें बिना झिझक और डर के खुल्लम खुल्ला अपनी माँ की चूत की चुदाई देखा करती थी। उनकी माँ और पिताजी अपने कमरे में ऐसे एक दूसरे को चोदते थे, जैसे कि चुदाई का नुमाईश लगा रखी है। वो अक्सर अपने कमरे की लाईट बिना बुझाए ही चुदाई करते थे। अब वो दोनों बहनें अपनी माँ और पिताजी की चुदाई देख-देखकर एक दूसरे की चूत में उंगली डालकर एक दूसरे की चूत को अपनी उंगलियों से चोदा करती थी और अपनी-अपनी मस्ती झड़ाया करती थी। उनके चाचा बहुत चुदक्कड थे और वो उनकी माँ को कई तरह से आगे से पीछे से, अपनी गोद में बैठाकर, लेटाकर, कुत्तिया बनाकर चोदते थे और उनकी चुदाई काफ़ी लम्बे समय तक चलती थी। उनकी माँ अपने देवर से अपनी चूत चुदवाते वक़्त तरह-तरह की आवाज निकालती थी और बहुत बड़बड़ाती थी। उनकी माँ की चूत में जैसे ही चाचा का लंड घुसता था। तो तब उनकी माँ अपने दोनों हाथ और पैरों से अपने देवर को बाँधकर अपनी कमर उछाल-उछालकर अपनी चूत में चाचा का लंड पिलवाती थी।

फिर उनका चाचा उनकी माँ की चूचीयों को पकड़कर चूसता और अपनी कमर उठा-उठाकर अपनी भाभी की चूत में अपना लंड पेलता था। फिर जब उनका चाचा झड़कर अपने वीर्य से उनकी चूत को भर देता था, तो तब उनकी माँ भी झड़कर शांत हो जाया करती थी। अब आशा अपने मन ही मन में यह जान चुकी थी की एक औरत अपनी चूत को कई आदमी के लंड से अपनी चूत चुदवा सकती है। फिर जब अजीत का लंड आशा की चूत की गर्मी की शांति के काबिल नहीं रहा, तो तब आशा ने यह बात अजीत को भी समझा दी। अब अजीत को भी कुछ परेशानी थी, हालाँकि अपनी शादी के शुरू के दिनों में वो अपनी पत्नी आशा की चूत में लंड की भूख शांत कर सकता था, लेकिन बाद में जब आशा उसको हर वक़्त मौका मिलते ही चोदने के लिए बोलती थी, तो वो अपने आपको कमजोर समझने लगा था। अब अजीत ने खुले शब्दों में आशा को यह बात बता दी थी और फिर उसने यह भी बता दिया कि उसका लंड तभी खड़ा होता है जब वो नंगी औरत की तसवीर देखता है या मन ही मन में यह सोचता है कि कोई दूसरा आदमी आशा को चोद रहा है और फिर अजीत ने आशा से यह भी बोला कि यह सब उसकी बचपन की बातों के लिए है ।।

धन्यवाद …

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