✽ रोजाना नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ ✽

loading...

चाची के साथ बस का सफर

0
loading...

प्रेषक : दानिश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम दानिश है। में 19 साल का हूँ और में कराची से थोड़ा दूर एक गाँव का रहने वाला हूँ, लेकिन कॉलेज के चक्कर में कराची अपने चाचा चाची के पास रहता हूँ। मेरी चाची का नाम महरूम है। मेरे चाचा और चाची जी दोनों कराची में रहते है, जहाँ मेरे चाचा जॉब करते है और क्योंकि वो अपनी जॉब के चक्कर में शहर से बाहर गये हुए थे और मेरी विंटर ब्रेक थी। अब मेरी चाची और में गाँव आए हुए थे। मेरी चाची की उम्र 31 साल थी और उनका चेहरा बहुत गोरा है। मेरी चाची का फिगर बहुत अच्छा है, लंबी टांगे, टाईट गांड और बड़े-बड़े बूब्स और वो हमेशा टाईट कपड़े पहनती थी, जिसमें उनका फिगर पूरा अच्छी तरह से नजर आता था।

फिर जब मेरी सर्दियों की छुट्टियाँ ख़त्म हुई तो तब मैंने वापस कराची जाने का इरादा किया, क्योंकि चाचा को अगले हफ्ते वापस आना था। अब घर में में और चाची अकेले होते थे। फिर हमारे गाँव से मेरे कज़िन ने हमें रात के टाईम कराची की बस में बैठाया, ताकि हम वापस जा सके। फिर बस में मैंने और चाची ने सीट साथ साथ ली, क्योंकि वो मुझे अब भी बच्चा समझती थी और बस में हमेशा मेरे साथ बैठती थी, ताकि में अकेला डर ना जाऊं। फिर बस में बैठने के साथ ही मुझे महसूस हुआ कि मैंने गाँव से निकलने से पहले बहुत पानी पिया था और अब मुझे थोड़ा-थोड़ा पेशाब आ रहा था। मगर बस का सफ़र सिर्फ़ 3 घंटे का था तो तब मैंने सोचा कि अब कराची जाकर ही पेशाब करूँगा। फिर बस चल पड़ी मगर फिर आहिस्ता-आहिस्ता। मुझे महसूस हुआ की मेरी पेशाब की फिलिंग ज़्यादा हो रही है और अब मुझे सही तरह से बैठा नहीं जा रहा था। अब में अपनी टांगे बार-बार हिला रहा था और अपना लंड भी पकड़ रहा था।

फिर मेरी चाची ने मुझे देखा और गुस्से से कहा कि दानिश बेटा ऐसे अपने आपको हाथ नहीं लगाते, बुरी बात है। तब मैंने देखा तो चाची के गाल लाल हो गये थे। तब मुझे भी शर्म आई और फिर मैंने अपने हाथ अपने लंड से हटा लिए मगर मुझसे फिर भी सीधा बैठा नहीं जा रहा था। अब मुझे बहुत ज़ोरो का पेशाब लग रहा था और मुझे जल्द ही कोई बाथरूम चाहिए था। फिर चाची ने फिर से मुझे देखा और इस बार उन्हें समझ आ गया था। फिर उन्होंने पूछा कि बेटा दानिश बाथरूम आई है क्या? तो तब मैंने शरमाते हुए कहा कि जी चाची जी सू सू आया है। तब चाची ने मुझसे पूछा कि घर से निकलने से पहले सू सू क्यों नहीं किया? तो तब मैंने कहा कि मुझे तब नहीं आ रही थी। फिर चाची बोली कि अभी तो बस चले सिर्फ़ 1 घंटा हुआ है और 2 घंटे का सफर बाक़ी है। फिर ये सुनकर में और घबरा गया कि में अब इतनी देर पेशाब कैसे रोकूंगा?

फिर चाची ने बस कंडक्टर को बुलाया और पूछा कि क्या इस बस को कराची से पहले कहीं रुकना है? और फिर मेरी तरफ इशारा करके कहा कि इस बच्चे को टॉयलेट जाना है। तब कंडक्टर हंस पड़ा और कहने लगा कि अब बड़े हो गये हो बेटा, रोकना सीख लो और चला गया था। अब में और शर्मा गया था, क्योंकि अब इर्द गिर्द सबको पता था कि मुझे अर्जेंट बाथरूम जाना है और अब में चाची की तरफ भीगी आँखों से देखने लगा था। फिर 20 मिनट और गुज़रे और अब मुझसे सू सू बिल्कुल भी नहीं रुक रहा था, तब मैंने चाची के कान के करीब अपना चेहरा करके कहा कि चाची अब मुझसे सू सू बिल्कुल भी नहीं रोका जा रहा है।

फिर चाची ने पहले कंडक्टर को देखा और फिर मेरी तरफ देखकर कहा कि एक तरीक़ा है जिससे में तुम्हारी सू सू रोकने में मदद कर सकती हूँ। तब में बोला कि क्या तरीक़ा है? चाची प्लीज बताओ, प्लीज मेरी मदद करो, वरना सू सू अंदर ही निकल जाएगा, अगर एक 19 साल के लड़के ने बस में सू सू कर दिया तो सारे मेरा मज़ाक़ बनाएगे। तब चाची ने कहा कि अच्छा मेरी बात सुनो अगर एक मर्द का लंड खड़ा हो तो वो सू सू नहीं कर सकता, तो में तुम्हारा लंड सहलाती हूँ, ताकि तुम्हें सू सू की फिलिंग कम हो। असल में तो मुझे अपनी सेक्सी चाची से ऐसे मौक़े का बहुत इंतज़ार था, मगर बस के बीच ऐसे करने से मुझे डर लग रहा था, शायद कोई उनको देख ले, लेकिन क्योंकि रात का वक़्त था और मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगा था, तो में तुरंत मान गया था।

फिर चाची ने आराम से मेरी जीन्स के बटन खोले और मेरा लंड अंडरवेयर के नीचे से पकड़ लिया। अब मेरा लंड पहले से ही सख़्त हो गया था, जब से चाची ने कहा था कि वो मेरा लंड सहलाएगी। फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और आहिस्ता-आहिस्ता उसे ऊपर नीचे करने लगी थी। उनके हाथ गोरे और मुलायम थे और छोटी-छोटी कलाइयाँ थी। फिर वो आराम-आराम से मेरे लंड के साथ खेलती रही, जब तक वो पूरा खड़ा नहीं हो गया। अब वो इधर उधर भी देख रही थी, ताकि कोई हमें देख ना ले। अब मुझे बहुत ज़्यादा गर्मी चढ़ना शुरू हो गयी थी, मगर मेरी सू सू की फिलिंग थोड़ी कम हो गयी थी। फिर चाची ने मेरी तरफ देखा और बोली कि अपना पानी जल्दी मत निकालना, क्योंकि फिर तुम्हें वापस ज़ोर का सू सू आने लगेगा। फिर वो मेरे लंड के साथ खेलती रही और में कोशिश करता रहा कि में अपना पानी ना निकालूँ। फिर मेरी नजर चाची के बूब्स पर पड़ी, जिसमें से उनकी दूध की चूचीयाँ नजर आ रही थी और क्योंकि वो झुकी हुई थी, तो उनकी क्लीवेज भी बड़ी अच्छी तरह नजर आ रही थी। अब इससे मेरा लंड और मज़बूत हो गया था और फिर चाची ने उसे ज़्यादा ज़ोर से पकड़ लिया और मेरी मुठ मारने लगी थी। तब में थोड़ी देर और रुक सका, मगर फिर मेरी मुठ अंडरवेयर और चाची के हाथ पर ही निकल गयी।

loading...

फिर तभी चाची चौंक गयी, क्योंकि मेरी इतनी ज़्यादा मुठ निकली थी कि मेरी पेंट आगे से गीली हो गयी थी। फिर में लंबी-लंबी साँस लेता हुआ पीछे होकर अपनी सीट पर लेट गया और फिर चाची ने अपना हाथ मेरी पेंट के अंदर से निकाल लिया। अब उनके हाथ पर बहुत सारा मेरे लंड का पानी लगा था और अब वो उसको देखने लगी थी। फिर उनकी नजर पड़ी की कंडक्टर उठकर हमारी तरफ आ रहा है। तो तब चाची को कुछ नहीं सूझा और फिर उन्होंने अपने हाथ से मेरी मुठ चाटनी शुरू कर दी, ताकि कंडक्टर देख ना ले की क्या हो रहा है? फिर उन्होंने 4-5 सेकेंड में अपने हाथ से सारी मुठ चाट ली और फिर वो भी सीधी होकर बैठ गयी थी। तभी इतनी देर में कंडक्टर आ गया और कहने लगा कि बस 20 मिनट के बाद एक स्टेशन पर रुकेगी, जल्दी से जाकर टॉयलेट कर आना, मगर क्योंकि अब मेरा पानी भी निकल आया था तो मेरी सू सू की फिलिंग वापस आ गयी थी और अब मुझे नहीं लग रहा था कि में 20 मिनट और रोक सकूँगा। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने चाची से कहा कि चाची मुझसे 20 मिनट टॉयलेट नहीं रोका जाएगा, प्लीज मेरी कोई और मदद करो ना। तब चाची बोली कि अब और क्या मदद करूँ में? अब इतनी जल्दी तुम्हें दुबारा फिलिंग देना भी मुश्किल है, क्योंकि तुमने अभी-अभी मुठ मारी है। तब मैंने ज़िद्द करते हुए कहा कि मुझे नहीं पता चाची, आपको मेरी मदद करनी होगी, वरना मेरा सू सू यही सीट पर निकल जाएगा। अब चाची सोच में पड़ गयी थी और फिर लंबी साँस लेकर कहती है कि चलो ठीक है में तुम्हारी गोद में अपना सिर रखकर सो जाती हूँ। तब मुझे कुछ समझ में नहीं आया। फिर उन्होंने अपना सिर मेरी गोद में रखा और अपने ऊपर बैग से एक चादर निकालकर डाल दी। फिर उन्होंने अपनी नर्म उंगलियों से मेरी पेंट खोली और मेरी अंडरवियर को नीचे किया।

फिर उन्होंने मेरा चिपचिपा लंड बाहर निकाला और अपने मुँह में डाल लिया। फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह से सहलाकर थोड़ा सख़्त किया, मगर वो पूरी तरह से खड़ा नहीं हो रहा था। फिर चाची ने अपना एक हाथ मेरे नीचे डाला और मेरी गांड भी सहलाने लगी थी। अब मेरा लंड थोड़ा और खड़ा हो रहा था और अब में उनको मुँह में ही देता जा रहा था। अब चाची अपनी दो उंगलियों से मेरी गांड सहला रही थी और मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी। अब इससे मेरा लंड काफ़ी ज़्यादा खड़ा हो गया था और अब मेरी पेशाब की फिलिंग कम होने लगी थी, मगर अब भी फिलिंग पूरी तरह से नीचे नहीं जा रही थी और अब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा नहीं था। तभी अचानक से चाची ने अपनी एक उंगली मेरी गांड के छेद में डाली, तो तब मेरी छोटी सी चीख निकल गयी। अब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और अब चाची मेरी गांड में अपनी एक उंगली हिलाने लगी थी और मेरे लंड को और ज़ोर-जोर से चूसने लगी थी।

अब मेरी पेशाब की फिलिंग कम हो गयी थी, मगर थोड़ी ही देर में मेरी मुठ फिर से निकल गयी। अब इस बार चाची ने सीधा मेरा पानी निगल लिया था और मेरे लंड को वापस मेरी पेंट में डालकर अपना सिर ऊपर कर लिया। फिर मेरी चाची ने कहा अब बस रुकने में सिर्फ़ 10 मिनट है। तुम बस सू सू रोककर रखो बेटा दानिश, फिर तुम टॉयलेट जा सकोगे, मगर जैसे ही मेरा लंड वापस नर्म हुआ तो मुझे फिर से ज़ोर का पेशाब लग गया। अब बस 10 मिनट इंतज़ार करना था और अब चाची भी मेरी कोई और मदद नहीं कर सकती थी। तब मैंने अपने लंड को अपनी दोनों टागों के बीच में दबा लिया, ताकि में पेशाब रोक सकूँ। अब मैंने अपने लंड को अपनी दोनों टागों के बीच में छुपाया था और उसको नीचे की तरफ किया हुआ था। अब में बार-बार अपने कूल्हें हिला रहा था, क्योंकि मुझे बहुत ज़ोर का सू सू आ रहा था और अभी भी बस रुकने में 5-6 मिनट थे।

फिर तभी अचानक से मुझे बहुत ज़ोर का पेशाब आया और थोड़ा सा पेशाब मेरी पेंट में ही निकल गया था, क्योंकि मेरा लंड नीचे की तरफ था तो पेशाब अंडरवियर की निचली साईड पर लगा और अब मेरी पेंट नीचे से गीली हो गयी थी। फिर मैंने अपने हाथ अपनी टागों पर रखे और फिर से पेशाब रोकने की कोशिश की, क्योंकि अभी तक मेरी पेंट ज़्यादा गीली नहीं हुई थी, शायद किसी को पता ना लगे। फिर मैंने थोड़ी देर और रोकने की कोशिश की, लेकिन फिर 1-2 मिनट के बाद मेरा थोड़ा और पेशाब पेंट में ही छूट गया। अब पेशाब 5-6 सेकेंड के लिए छूटा था और मेरी अंडरवेयर और पेंट नीचे से और गीली हो गयी थी। अब चाची को नजर नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है? क्योंकि मेरा सारा पेशाब नीचे की तरफ निकल रहा था, मगर अब मेरी गांड काफ़ी गीली हो गयी थी और तो और नीचे मेरी सीट भी बहुत ज्यादा गीली हो गयी थी।

loading...

फिर मैंने देखा कि बस स्लो हो रही थी और रुकने लगी थी। तब में तुरंत उठ गया, ताकि में सबसे पहले बस से निकलकर सू सू कर सकूँ, लेकिन जैसे ही में उठा मेरी चाची ने मेरी गांड और सीट देख ली और अब वो समझ गयी थी कि मेरा थोड़ा पेशाब अंदर ही निकल गया है। फिर तब उन्होंने अपने मुँह पर अपना हाथ रखते हुए कहा कि बेटा दानिश तुमसे सू सू नहीं रोका गया? तो तब मैंने शर्माकर जवाब दिया कि बस चाची थोड़ा सा निकला है बाक़ी में बाहर कर लूँगा। फिर जैसे ही बस रुकी तो में भागता हुआ आगे गया और बस से उतर गया। अब मुझे बस के लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थी। एक औरत ने कहा उस लड़के ने पेंट में ही पेशाब कर दिया, एक बच्चे ने अपनी माँ से पूछा इतने बड़े होकर भी लोग पेंट में पेशाब कर देते है माँ? और बस का कंडक्टर हंस रहा था। फिर में बस के रुकते ही बस से उतर गया। अब इतने ही टाईम में मेरा थोड़ा और पेशाब छूट गया था और मेरी एक टांग घुटने तक गीली हो गयी थी। फिर इतनी देर में मैंने बस से दूसरी तरफ देखकर अपनी पेंट नीचे खींची और ज़ोर से पेशाब करने लगा।

मुझे पता था कि बस के सारे लोग मेरी गीली गांड और पेंट देख सकते है, मगर मेरे पास कोई और चारा नहीं था। फिर मैंने पेशाब करना ख़त्म किया और अपनी पेंट ऊपर कर ली। अब मेरी पेंट बहुत ज़्यादा गीली हो गयी थी और अब मुझे अपनी गांड और टागें गीली और ठंडी लग रही थी। फिर में शर्म के मारे अपना सिर नीचे करके बस में वापस आया तो तब मैंने देखा कि बहुत से लोग मुझ पर हंस रहे थे। फिर में जाकर अपनी चाची के साथ गीली सीट पर बैठ गया और देखा कि चाची मुझे प्यार और दुख से देख रही थी। फिर उन्होंने मेरे सिर को पकड़ा और अपनी छाती से लगा लिया और मुझसे कहने लगी कि कुछ नहीं होता बेटा, ऐसा कभी ना कभी सबके साथ होता है, अगली बार से घर से निकलने से पहले सू सू किया करो ।।

धन्यवाद …

इस कहानी को Whatsapp और Facebook पर शेयर करें ...

Comments are closed.