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चाचा ने मेरी मम्मी को चोदा

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प्रेषक : अनिल …

हैल्लो दोस्तों, मेरे पापा शहर में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और में अपनी मम्मी कविता के साथ गाँव में रहता था, क्योंकि पापा की इनकम इतनी नहीं थी कि वो शहर में घर किराये पर लेकर हमें अपने साथ रख ले। मेरा चाचा रमेश अभी बैचलर था और गाँव में खेती का काम करता था और मम्मी घर का काम करती थी। मेरे पापा हर शनिवार शाम को घर आते थे और रविवार शाम को वापस चले जाते थे। ये घटना उस समय की है जब पापा को कंपनी ने 1 साल के लिए दुबई भेजा था। उस समय मम्मी की उम्र 32 साल थी और मेरी उम्र 12 साल थी। अब में आपको मम्मी के बारे में बताता हूँ मेरी मम्मी का रंग गोरा और शरीर भरा हुआ था, मम्मी की ब्रेस्ट बहुत बड़ी थी, जो उनकी कमीज से ज्यादातर टाईम बाहर दिखती थी, क्योंकि मम्मी काम करते हुए दुप्पटा उतारकर रख देती थी और उनके चूतड़ भी बहुत बड़े थे।

फिर पापा के जाने के 1 महीने तक तो सब नॉर्मल चलता रहा, लेकिन उसके बाद चाचा मम्मी के बदन को घूरते रहते और फिर अपने लंड को अपनी लुंगी के ऊपर से सहलाते तो उनका लंड तन जाता था और लुंगी में आगे साफ खड़ा दिखाई पड़ता था। जब मम्मी झुककर सफाई करती, तो चाचा उनकी चूचीयों को देखते रह जाते थे। फिर चाचा तैयार होकर खेतो में चले जाते और लंच टाईम पर वापस घर आते थे। अब मेरी गर्मी कि छुट्टीयाँ चल रही थी और खेतो में काम बढ़ गया था, तो चाचा वहीं रुक जाते थे और मम्मी लंच बनाकर मुझे लेकर खेतो में चली जाती थी और फिर चाचा का खेत के काम में मदद करती थी।

फिर एक दिन में क्रिकेट खेलने के लिए रुक गया, तो मम्मी अकेले ही खेत की तरफ चल दी। हमारा खेत घर से 20 मिनट की दूरी पर था। फिर 30 मिनट के बाद हमारा बेट टूट गया, तो हमने खेल बंद कर दिया, और में सीधा खेतो की तरफ चल पड़ा। तब खेतों में फसल लगभग 5 फीट ऊँची हो चुकी थी और हमारे खेत अलग से जंगल के किनारे पर थे, जहाँ हमारे सिवा कोई नहीं आता था। फिर में एक खेत के किनारे पर पहुँचा तो मैंने देखा कि मम्मी ने अपनी साड़ी उतारकर रख दी थी और अब वो पेटीकोट और ब्लाउज में घुटनों के बल बैठकर काम कर रही थी और उनके ठीक पीछे चाचा खड़े हुए थे और फिर उन्होंने चुपके से अपनी लुंगी उतार दी। अब उनका 6 इंच का लंड तनकर खड़ा था, जिसे वो अपने एक हाथ से हिला रहे थे। अब मम्मी को कोई खबर नहीं थी। फिर चाचा ने मम्मी के कंधो पर अपना एक हाथ रखा। तो मम्मी ने अपना सिर पीछे किया तो मम्मी के होंठ और गाल चाचा के लंड पर रगड़ गये और मम्मी झटके से खड़ी हो गयी।

फिर चाचा ने मम्मी को अपनी तरफ किया और पकड़ लिया। तो तब मम्मी बोली कि रमेश ये तुम क्या कर रहे हो? तो तब चाचा बोला कि भाभी देख तेरा पति 1 साल के लिए बाहर गया है और तू चाहे तो में तेरी प्यास बुझा सकता हूँ, मैंने कल रात को तुझे अपनी चूत में उंगली करते देखा था और इतनी सुंदर चूत को लंड से ही ठंडा किया जा सकता है और मेरे लंड की प्यास भी बुझ जाएगी। तो मम्मी रात की बात पर थोड़ी शर्मा गयी। तो चाचा ने तुरंत मम्मी की चूचीयाँ रगड़ दी, तो मम्मी पीछे हट गयी। तो तब चाचा बोला कि अब भाभी मान भी जा, यहाँ हमें कोई देखने वाला भी नहीं है और में चाहूँ तो जबरदस्ती तेरी चूत चोद सकता हूँ, लेकिन उससे ज्यादा मज़ा तेरी मर्ज़ी से करने में आएगा और फिर चाचा ने मम्मी का दायाँ हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और बोला कि देख भाभी मेरा लंड तेरी चूत चोदने के लिए बिल्कुल तैयार है। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब मम्मी लंड पर अपनी पकड़ बनाकर उसको महसूस करने लगी थी, लेकिन वो अभी भी विरोध कर रही थी। तो तब चाचा बोला कि भाभी में यह किसी को नहीं बताऊंगा, बस तू एक बार मान जा। अब मम्मी चाचा के लंड को अपने एक हाथ से रगड़ने लगी थी और बोली कि ठीक है रमेश, बाहर किसी और मर्द के लंड से चुदने की बजाए अपने देवर के लंड से चुदाई करा लेती हूँ, अब 1 साल तक तेरे लंड का ही सहारा है। अब ये सुनते ही चाचा तो जैसे पागल हो गया था और मम्मी को ज़ोर से चूम लिया और मम्मी के ब्लाउज के बटन को खोल दिए। मम्मी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो उनकी गोरी-गोरी चूचीयाँ एक झटके में ही बाहर आ गयी थी, उनके निप्पल 1 इंच लम्बे थे। अब चाचा ने मम्मी की दोनों चूचीयों को अपने दोनों हाथों से ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया था। तो मम्मी की चीख निकलने लगी आराम से देवर जी, मेरी चूचीयाँ किसी भैस की नहीं है जो दूध निकलेगा। फिर तब चाचा हँसते हुए बोला कि भाभी तू चाहे तो इनमें से दूध भी आ जाएगा। तो तब मम्मी बोली कि अभी तो मेरा सेफ टाईम चल रहा है, लेकिन आगे के लिए ध्यान रखना।

अब मम्मी ने अपना पेटीकोट उतार दिया था और चाचा के लंड को छोड़कर झुककर अपनी पेंटी उतारने लगी थी, तो चाचा का लंड उनके होंठो पर टच हो रहा था। तो तब चाचा बोला कि भाभी चूसेगी? तो तब मम्मी बोली कि अब जब तेरे लंड से चुदने का प्रोग्राम बना लिया है तो में अब हर तरीके से सेक्स का मज़ा लूँगी और फिर मम्मी ने अपने घुटनों के बल बैठकर चाचा के लंड के टोपे को अपनी जीभ से टच किया। तो चाचा की आह निकल गयी और फिर मम्मी ने चाचा के लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर-जोर से चूसने लगी। तो चाचा और ज़ोर से अया, आआआ, आआआ की आवाजे करने लगा और फिर मम्मी ने जितना हो सकता था चाचा का लंड अपने मुँह में भर लिया और उसे लॉलीपोप की तरह चूसने लगी थी। फिर तभी चाचा ने मम्मी के सिर को पकड़ा और अपना लंड आगे पीछे करने लगा जैसे मम्मी के मुँह को ही चोद रहा हो।

फिर मम्मी ने चाचा की गांड को पकड़कर सहारा लिया और खुद भी अपने मुँह को और तेज़ी से आगे पीछे करने लगी। अब मम्मी की गू-गू की आवाज़े आ रही थी और फिर 5 मिनट के बाद चाचा ने मम्मी के सिर को छोड़ा। तो मम्मी ने चाचा के लंड को बाहर निकाला, तो उनका लंड थूक में और ज्यादा चमक रहा था और ज्यादा मोटा लग रहा था। अब मम्मी जमीन पर पीठ के बल लेट गयी थी और अपनी दोनों टांगे फैला दी थी। मैंने पहली बार किसी जवान औरत की चूत देखी थी और वो भी अपनी मम्मी की। उसके पिंक कलर के होंठ बाहर की तरफ निकले हुए थे और अब मम्मी उन्हें अपने हाथ से रगड़ रही थी और फिर अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाल दी। तो तब चाचा बोला कि भाभी अब तो तेरी चूत को लंड मिल रहा है तो उंगली मतकर। तो तब मम्मी बोली कि रमेश जल्दी से आजा, अब और नहीं रुका जा रहा है।

फिर चाचा मम्मी के ऊपर लेट गया और अपनी कमर को ऊपर करके अपने एक हाथ से अपने लंड को मम्मी की चूत के उपर रगड़ने लगा था। तो मम्मी छटपटा उठी और चाचा की गांड पर अपना हाथ रखकर उन्हें नीचे करने लगी थी। तो मुझे उनकी चूत में चाचा के लंड का टोपा जाता हुआ दिखाई दिया और मम्मी की मस्ती से भरी हुई आह निकल गयी। फिर चाचा ने एक ज़ोर का झटका दिया, तो उनका लंड पूरा अंदर मम्मी की चूत को फाड़ता हुआ दाखिल हो गया और मम्मी की चीख निकल गयी और वो दर्द से कहराने लगी थी रमेश जरा बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है, आआआह, आअहह, लेकिन चाचा ने झटके लगाने शुरू कर दिए थे और बोला कि भाभी मज़े लेने है तो थोड़ा दर्द तो सहन करना पड़ेगा और फिर और ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। फिर मम्मी चीखने लगी और कुछ देर के बाद चाचा का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा।

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अब मम्मी भी मज़े ले रही थी और अपनी गांड उठा-उठाकर चाचा का साथ दे रही थी और ज़ोर से चोद मुझे, आज मेरी चूत फाड़ डाल मेरे देवर जी। तो तभी चाचा ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। अब उनके लंड और मम्मी की चूत का घप-घप का शोर अब मुझे साफ-साफ़ सुनाई दे रहा था। फिर 15 मिनट तक मम्मी को चोदने के बाद चाचा ने अपने लंड को मम्मी की चूत में से बाहर निकाला और मम्मी की छाती पर चढ़ गया और इससे पहले मम्मी कुछ समझ पाती, उन्होंने अपना लंड मम्मी के मुँह में डाल दिया और 5-6 झटके मारे और फिर उनका शरीर सख़्त हो गया। अब उन्होंने मम्मी के सिर को पकड़ रखा था और उनका सारा पानी मम्मी के मुँह में झड़ गया था। अब मम्मी के गाल फूल गये थे। अब पहले तो मम्मी छूटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन फिर उन्होंने सारा पानी पी लिया। फिर जब चाचा ने मम्मी के सिर को छोड़ा, तो तब भी मम्मी उनके लंड को चूसती रही और जब उनके लंड को बिल्कुल चूसकर सारा पानी पी लिया, तो तब उन्होंने अपने लंड को उनके मुँह से बाहर निकाला। फिर चाचा भी मम्मी की बगल में ही लेट गये।

अब वो दोनों गहरी साँस ले रहे थे। फिर चाचा बोला कि भाभी बहुत टाईट चूत है तेरी, साला मेरा पूरा लंड छिल गया। तो तब मम्मी बोली कि नहीं देवर जी तुम्हारा लंड ही इतना मोटा है, मेरी चूत तो आज फट ही गयी थी और मैंने आज तक तेरे भाई का लंड अपने मुँह में नहीं लिया, लेकिन आज तेरे लंड को चूसने के बाद मुझे लंड के पानी का स्वाद पता चला है, अब तो में चूत की बजाए तेरे लंड का पानी रोज पीऊँगी और फिर वो दोनों उठकर कपड़े पहनने लगे। फिर तब चाचा बोला कि भाभी आज रात तुझे घर पर फिर से चोदूंगा। तो तब मम्मी बोली कि मेरी जान तू जितना चाहे मुझे चोद सकता है। फिर चाचा ने मम्मी को चुम्मा और फिर मम्मी घर की तरफ चल दी। दोस्तों ये मेरी मम्मी की चुदाई की सच्ची घटना है ।।

धन्यवाद …

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